०६५ दुरितनाशनम् ...{Loading}...
Whitney subject
65 (67). To the plant apāmārgá: for cleansing.
VH anukramaṇī
दुरितनाशनम्।
१-३ शुक्रः। अपामार्गवीरुत। अनुष्टुप्।
Whitney anukramaṇī
[śukra.—tṛcam. apāmārgavīrudddivatam. ānuṣṭubham.]
Whitney
Comment
Not found in Pāipp. Used by Kāuś. (46. 49) in a ceremony of expiation, with a fire of apāmārgá; and vss. 1, 2 are reckoned (note to 39. 7) to the kṛtyā gaṇa. And the comm. regards vss. 2 and 3 as intended at 76. 1 in the nuptial ceremonies, instead of xiv. 2. 66 (both verses having the same pratīka); in this he is evidently wrong.
Translations
Translated: Grill, 38, 186; Henry, 25, 89; Griffith, i. 358; Bloomfield, 72, 556.
Griffith
A charm against imprecation and threatened evils
०१ प्रतीचीनफलो हि
विश्वास-प्रस्तुतिः ...{Loading}...
प्र॑ती॒चीन॑फलो॒ हि त्वमपा॑मार्ग रु॒रोहि॑थ।
सर्वा॒न्मच्छ॒पथाँ॒ अधि॒ वरी॑यो यावया इ॒तः ॥
मूलम् ...{Loading}...
मूलम् (VS)
प्र॑ती॒चीन॑फलो॒ हि त्वमपा॑मार्ग रु॒रोहि॑थ।
सर्वा॒न्मच्छ॒पथाँ॒ अधि॒ वरी॑यो यावया इ॒तः ॥
०१ प्रतीचीनफलो हि ...{Loading}...
Whitney
Translation
- Since thou, O off-wiper (apāmārgá), hast grown with reverted fruit,
mayest thou repel (yu) from me all curses very far from here.
Notes
⌊The verse closely resembles iv. 19. 7.⌋ All the authorities (except one
of SPP’s) read apāmārga without accent at beginning of b; both
texts make the necessary correction to áp-. The comm. understands the
plant (Achyranthes aspera: see note to iv. 17. 6) to be used here as
fuel.
Griffith
With retroverted fruit hast thou, O Apamarga, sprung and grown. Hence into distance most remote drive every curse away from, me.
पदपाठः
प्र॒ती॒चीन॑ऽफलः। हि। त्वम्। अपा॑मार्ग। रु॒रोहि॑थ। सर्वा॑न्। मत्। श॒पथा॑न्। अधि॑। वरी॑यः। य॒व॒याः॒। इ॒तः। ६७.१।
अधिमन्त्रम् (VC)
- अपामार्गवीरुत्
- शुक्रः
- अनुष्टुप्
- दुरितनाशन सूक्त
पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी - विषयः
वैद्य के कर्म का उपदेश।
पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी - पदार्थः
पदार्थान्वयभाषाः - (अपामार्ग) हे सर्वसंशोधक वैद्य ! [वा अपामार्ग औषध !] (त्वम्) तू (हि) निश्चय करके (प्रतीचीनफलः) प्रतिकूलगतिवाले रोगों का नाश करनेवाला (रुरोहिथ) उत्पन्न हुआ है। (इतः मत्) इस मुझसे (सर्वान्) सब (शपथान्) शापों [दोषों] को (अधि) अधिकारपूर्वक (वरीयः) अतिदूर (यवयाः) तू हटा देवे ॥१॥
पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी - भावार्थः
भावार्थभाषाः - जैसे वैद्य अपामार्ग आदि औषध से रोगों को दूर करता हैं, वैसे ही विद्वान् अपने आत्मिक और शारीरिक दोषों को हटावे ॥१॥ अपामार्ग औषध विशेष है, जिससे कफ़ बवासीर, खुजली, उदररोग और विषरोग का नाश होता है−देखो अ० ४।१७।६ ॥
पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी - पादटिप्पनी
टिप्पणी: १−(प्रतीचीनफलः) अ० ५।१९।७। प्रतिकूलगतिमतां रोगाणां विदारकः (हि) निश्चयेन (त्वम्) (अपामार्ग) अ० ४।१७।६। हे सर्वथा संशोधक वैद्य। औषधविशेष (रुरोहिथ) रुह बीजजन्मनि प्रादुर्भावे च-लिट् उत्पन्नो बभूविथ (सर्वान्) (मत्) मत्तः (शपथान्) शापान् दोषान् (अधि) अधिकृत्य (वरीयः) उरुतरम्। अति दूरम् (यावयाः) यु मिश्रणामिश्रणयोः-लेटि, आडागमः, सांहितिको दीर्घः। पृथक् कुर्याः (इतः) अस्मात् ॥
०२ यद्दुष्कृतं यच्छमलम्
विश्वास-प्रस्तुतिः ...{Loading}...
यद्दु॑ष्कृ॒तं यच्छम॑लं॒ यद्वा॑ चेरिम पा॒पया॑।
त्वया॒ तद्वि॑श्वतोमु॒खापा॑मा॒र्गाप॑ मृज्महे ॥
मूलम् ...{Loading}...
मूलम् (VS)
यद्दु॑ष्कृ॒तं यच्छम॑लं॒ यद्वा॑ चेरिम पा॒पया॑।
त्वया॒ तद्वि॑श्वतोमु॒खापा॑मा॒र्गाप॑ मृज्महे ॥
०२ यद्दुष्कृतं यच्छमलम् ...{Loading}...
Whitney
Translation
- What [is] ill-done, what pollution, or what we have practised
evilly—by thee, O all-ways-facing off-wiper, we wipe that off
(apa-mṛj).
Notes
Or (b) ‘if we have gone about evilly.’ All the authorities have
táyā instead of tváyā at beginning of c, but both texts make the
obviously necessary correction. The comm. reads tvayā.
Griffith
Whatever evil we have done, whatever vile or sinful act, With thee, O Apamarga, who lookest all ways, we wipe it off.
पदपाठः
यत्। दुः॒ऽकृ॒तम्। यत्। शम॑लम्। यत्। वा॒। चे॒रि॒म। पा॒पया॑। त्वया॑। तत्। वि॒श्व॒तः॒ऽमु॒ख॒। अपा॑मार्ग। अप॑। मृ॒ज्म॒हे॒। ६७.२।
अधिमन्त्रम् (VC)
- अपामार्गवीरुत्
- शुक्रः
- अनुष्टुप्
- दुरितनाशन सूक्त
पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी - विषयः
वैद्य के कर्म का उपदेश।
पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी - पदार्थः
पदार्थान्वयभाषाः - (यत्) जो कुछ (दुष्कृतम्) दुष्कर्म (यद् वा) अथवा (यत्) जो कुछ (शमलम्) मलिन कर्म (पापया) पाप बुद्धि से (चेरिम) हमने किया है। (विश्वतोमुख) हे सब ओर मुख रखनेवाले ! [अतिदूरदर्शी] (अपामार्ग) हे सर्वथा संशोधक ! (त्वया) तेरे साथ (तत्) उसको (अप मृज्महे) हम शोधते हैं ॥२॥
पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी - भावार्थः
भावार्थभाषाः - मनुष्य दुष्कर्म और मलिनकर्म से उत्पन्न रोगों को सद्वैद्य की सम्मति से औषध द्वारा निवृत्त करें ॥२॥
पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी - पादटिप्पनी
टिप्पणी: २−(यत्) यत् किञ्चित् (दुष्कृतम्) दुष्कर्म (यत्) (शमलम्) अ० ४।९।६। मालिन्यम् (यद् वा) अथवा (चेरिम) चर गतिभक्षणयोः-लिट्। वयं कृतवन्तः (पापया) पापबुद्ध्या (त्वया) (तत्) दुष्कृतं शमलं वा (विश्वतोमुख) सर्वदिङ्मुख। अतिदूरदर्शिन् (अपामार्ग) म० १। सर्वथा संशोधक (अप मृज्महे) सर्वथा शोधयामः ॥
०३ श्यावदता कुनखिना
विश्वास-प्रस्तुतिः ...{Loading}...
श्या॒वद॑ता कुन॒खिना॑ ब॒ण्डेन॒ यत्स॒हासि॒म।
अपा॑मार्ग॒ त्वया॑ व॒यं सर्वं॒ तदप॑ मृज्महे ॥
मूलम् ...{Loading}...
मूलम् (VS)
श्या॒वद॑ता कुन॒खिना॑ ब॒ण्डेन॒ यत्स॒हासि॒म।
अपा॑मार्ग॒ त्वया॑ व॒यं सर्वं॒ तदप॑ मृज्महे ॥
०३ श्यावदता कुनखिना ...{Loading}...
Whitney
Translation
- If we have been together with one dark-toothed, ill-nailed,
mutilated, by thee, O off-wiper, we wipe off all that.
Notes
The comm. reads vaṇḍena in b; and he has also āśima for āsima,
which is not a bad emendation.
Griffith
If with the cripple we have lived, whose teeth are black and nails deformed, With thee, O Apamarga, we wipe all that ill away from us.
पदपाठः
श्या॒वऽद॑ता। कु॒न॒खिना॑। ब॒ण्डेन॑। यत्। स॒ह। आ॒सि॒म। अपा॑मार्ग। त्वया॑। व॒यम्। सर्व॑म्। तत्। अप॑। मृ॒ज्म॒हे॒। ६७.३।
अधिमन्त्रम् (VC)
- अपामार्गवीरुत्
- शुक्रः
- अनुष्टुप्
- दुरितनाशन सूक्त
पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी - विषयः
वैद्य के कर्म का उपदेश।
पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी - पदार्थः
पदार्थान्वयभाषाः - (श्यावदता) काले दाँतवाले, (कुनखिना) दूषित नखवाले (बण्डेन) बण्डे [टेढ़े-मेढ़े अङ्गवाले रोगी] के (सह) साथ (यत्) जो (आसिम) रहे हैं। (अपामार्ग) हे सर्वथा संशोधक ! [वैद्य वा अपामार्ग औषध !] (त्वया) तेरे साथ (वयम्) हम (तत् सर्वम्) उस सबको (अप मृज्महे) शोधते हैं ॥३॥
पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी - भावार्थः
भावार्थभाषाः - यदि रोग की व्याकुलता से शरीर अङ्गभङ्ग हो जावे, उसे ओषधि द्वारा स्वस्थ करें ॥३॥
पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी - पादटिप्पनी
टिप्पणी: ३−(श्यावदता) विभाषा श्यावारोकाभ्यां च पा०। पा० ५।४।१४४। श्यावपदादुत्तरस्य दन्तस्य दतृ इत्यादेशः। कृष्णदन्तयुक्तेन (कुनखिना) दूषितनखयुक्तेन (बण्डेन) बडि विभाजने, वेष्टने च-अच्। विकलाङ्गेन (यत्) (सह) (आसिम) अस भुवि-लङ्, इत्वं छान्दसम्। आस्म। अभवाम। अन्यत् स्पष्टम् ॥