०२५ सीताविलापः

वाचनम्
सर्वाष् टीकाः
Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy - Intro

Book V : Sundara Kanda - Book Of Beauty

Seetha calls out Rama and others and bursts into a wail not being able to endure the threats of ogre women.

स्रोतः: valmikiramayan.net

भागसूचना
  1. राक्षसियोंकी बात माननेसे इनकार करके शोक-संतप्त सीताका विलाप करना
विश्वास-प्रस्तुतिः

अथ तासां वदन्तीनां परुषं दारुणं बहु ।
राक्षसीनामसौम्यानां रुरोद जनकात्मजा ॥ १ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

अथ तासां वदन्तीनां परुषं दारुणं बहु ।
राक्षसीनामसौम्यानां रुरोद जनकात्मजा ॥ १ ॥


तथा तासां वदन्तीनां परुषं दारुणं बहु ।
राक्षसीनामसौम्यानां रुरोद जनकात्मजा ॥

अनुवाद (हिन्दी)

जब वे क्रूर राक्षसियाँ इस प्रकारकी बहुत-सी कठोर एवं क्रूरतापूर्ण बातें कह रही थीं, उस समय जनकनन्दिनी सीता अधीर हो-होकर रो रही थीं ॥ १ ॥

अनुवाद (कन्नड)

क्रूरस्वभावद आ राक्षसियरु हॆच्चागि भयपडिसुव कठोरवू, दारुणवू आद मातुगळन्नु केळि जानकियु अळतॊडगिदळु.॥1॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

1; atha = thereafter; taasaam = (as) those; raakshasiinaam = ogre women; asaumyaanaam = with a cruel nature;vadantiinaam = were speaking; bahu = a lot; parushham = harshly; daaruNam = (and) horribly;janakaatmajaa = Seetha; ruroda = cried.

अनुवादः

As those ogre woman with a cruel nature were speaking a lot harshly and horribly, Seetha cried.

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

एवमुक्ता तु वैदेही राक्षसीभिर्मनस्विनी ।
उवाच परमत्रस्ता बाष्पगद‍्गदया गिरा ॥ २ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

एवमुक्ता तु वैदेही राक्षसीभिर्मनस्विनी ।
उवाच परमत्रस्ता बाष्पगद‍्गदया गिरा ॥ २ ॥

अनुवाद (हिन्दी)

उन राक्षसियोंके इस प्रकार कहनेपर अत्यन्त भयभीत हुई मनस्विनी विदेहराजकुमारी सीता नेत्रोंसे आँसू बहाती गद‍्गद वाणीमें बोलीं— ॥ २ ॥

अनुवाद (कन्नड)

भयग्रस्तळागिद्दरू पातिव्रत्यदल्लि दृढचित्तळागिद्द सीतादेवियु कण्णीरिडुत्ता गद्गदवाद स्वरदिन्द कूडि तडवरिसुत्ता हीगॆ हेळिदळु.॥2॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

2. evam = thus; uktaa = being spoken to; raakshasiibhiH = by ogre women; vaidehii = Seetha; manasvinii = with a good mind; paramatrastaa = being frightened a lot; baashhpa gadgadayaa giraa = with a voice indistinct due to tears; uvaacha = spoke (as follows).

अनुवादः

Thus being spoken to by ogre women, Seetha with a good mind being frightened a lot spoke as follows with a voice indistinct due to tears.

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

न मानुषी राक्षसस्य भार्या भवितुमर्हति ।
कामं खादत मां सर्वा न करिष्यामि वो वचः ॥ ३ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

न मानुषी राक्षसस्य भार्या भवितुमर्हति ।
कामं खादत मां सर्वा न करिष्यामि वो वचः ॥ ३ ॥

अनुवाद (हिन्दी)

‘राक्षसियो! मनुष्यकी कन्या कभी राक्षसकी भार्या नहीं हो सकती । तुम्हारा जी चाहे तो तुम सब लोग मिलकर मुझे खा जाओ, परंतु मैं तुम्हारी बात नहीं मानूँगी’ ॥ ३ ॥

अनुवाद (कन्नड)

राक्षसस्त्रीयरे! मनुष्य स्त्रीयु राक्षसन भार्यॆयागलु खण्डितवागि अर्हळल्ल. नीवु बयसुविरादरॆ ऎल्लरू नन्नन्नु तिन्दु बिडि. नानु मात्र निम्म मातिनन्तॆ ऎन्दिगू नडॆदुकॊळ्ळुवुदिल्ल.॥3॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

3. maanushhii = a human woman; na arhati = is not suited; bhavitum = to become; bhaaryaa = a wife; raakshasasya = of an ogre; sarvaaH = all of you; khaadata = eat; maam = me; kaamam = according to your desire;na karishhyaami = I will not do; vaH = (according to) your; vachaH = words.

अनुवादः

“A human woman is not suited to become a wife of an ogre. All of you eat me according to your desire. I will not do according to your words.”

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

सा राक्षसीमध्यगता सीता सुरसुतोपमा ।
न शर्म लेभे शोकार्ता रावणेनेव भर्त्सिता ॥ ४ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

सा राक्षसीमध्यगता सीता सुरसुतोपमा ।
न शर्म लेभे शोकार्ता रावणेनेव भर्त्सिता ॥ ४ ॥


सा राक्षसीमध्यगता सीता सुरसुतोपमा ।
न शर्म लेभे दुःखार्ता रावणेन च तर्जिता ॥

अनुवाद (हिन्दी)

राक्षसियोंके बीचमें बैठी हुई देवकन्याके समान सुन्दरी सीता रावणके द्वारा धमकायी जानेके कारण शोकसे आर्त-सी होकर चैन नहीं पा रही थीं ॥ ४ ॥

अनुवाद (कन्नड)

रावणनिन्द भयपडिसल्पट्ट देवकन्यॆयन्तिद्द आ सीतादेवियु राक्षसस्त्रीयर मध्यदल्लि बिक्कि-बिक्किअळुत्ता दुःखार्तॆयागि शान्तियन्नु कळकॊण्डिद्दळु.॥4॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

4. raakshsaiimadhyagataa = being in the middle of ogre women; tarjitaa = being frightened; raavaNena cha = by Ravana also; surasutopamaa = like a daughter of gods; saa siitaa = that Seetha; na lebhe = did not get; sharma = comfort; duHkhaartaa = being tormented by grief.

अनुवादः

Being in the middle of ogre women, being frightened by Ravana also, like a daughter of gods, that Seetha did not get comfort being tormented by grief.

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

वेपते स्माधिकं सीता विशन्तीवाङ्गमात्मनः ।
वने यूथपरिभ्रष्टा मृगी कोकैरिवार्दिता ॥ ५ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

वेपते स्माधिकं सीता विशन्तीवाङ्गमात्मनः ।
वने यूथपरिभ्रष्टा मृगी कोकैरिवार्दिता ॥ ५ ॥

मूलम् - VR

वेपते स्माधिकं सीता विशन्ती वाङ्गमात्मनः । वने यथा परिभ्रष्टा मृगी कोकैरिवार्दिता ॥ ५-२५-५

अनुवाद (हिन्दी)

जैसे वनमें अपने यूथसे बिछुड़ी हुई मृगी भेड़ियोंसे पीड़ित होकर भयके मारे काँप रही हो, उसी प्रकार सीता जोर-जोरसे काँप रही थीं और इस तरह सिकुड़ी जा रही थीं, मानो अपने अंगोंमें ही समा जायँगी ॥ ५ ॥

अनुवाद (कन्नड)

अरण्यदल्लि गुम्पिनिन्द तप्पिसिकॊण्डु तोळगळ मध्यदल्लि सिक्कि पीडिसल्पडुव जिङ्कॆयन्तॆ सीतादेवियु तन्न शरीरवन्नु मुदुडिसिकॊण्डु गड-गडनॆ नडुगुत्तिद्दळु.॥5॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

5. mR^igiiva = like a fawn; vane = in a forest; yuudhaparibhrashhTaa = lost from its herd; arditaa = tormented; kokaiH = by wolves; vishantiiva = (Seetha was) as though sinking (into); aatmanaH = own; aN^gam = body; vepate sma = (and) shook; adhikam = a lot.

अनुवादः

Like a fawn in a forest lost from its herd and tormented by wolves, Seetha was as though sinking into own body and shook a lot.

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

सा त्व् अशोकस्य विपुलां
शाखामालम्ब्य पुष्पिताम् ।
चिन्तयाम् आस शोकेन
भर्तारं भग्नमानसा ॥ ६ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

सा त्वशोकस्य विपुलां शाखामालम्ब्य पुष्पिताम् ।
चिन्तयामास शोकेन भर्तारं भग्नमानसा ॥ ६ ॥


सा त्वशोकस्य विपुलां शाकामालम्ब्य पुष्पिताम् ।
चिन्तयामास शोकेन भर्तारं भग्नमानसा ॥

अनुवाद (हिन्दी)

उनका मनोरथ भंग हो गया था । वे हताश-सी होकर अशोकवृक्षकी खिली हुई एक विशाल शाखाका सहारा ले शोकसे पीड़ित हो अपने पतिदेवका चिन्तन करने लगीं ॥ ६ ॥

अनुवाद (कन्नड)

शोकाभिभूतॆयागि, भग्नमानसळाद सीतादेवियु चॆन्नागि अरळिद हूवु गळिन्दॊडगॊण्ड अशोक वृक्षद ऒन्दु दॊड्ड टॊङ्गॆयन्नु आधरिसिकॊण्डु पतियन्ने चिन्तिसुत्ता इद्दळु.॥6॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

6. saa tu = that Seetha; bhagna maanasaa = with a broken heart; shokena = due to grief; aalambya = holding; pushhpitaam shaakhaam = a flowering branch; vipulaam = which was wide; ashokasya = of Ashoka tree; chintayaamaasa = thought; bhartaaram = about husband.

अनुवादः

That Seetha with a broken heart due to grief, held a wide flowering branch of Ashoka tree and thought about Her husband.

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

सा स्नापयन्ती विपुलौ स्तनौ नेत्रजलस्रवैः ।
चिन्तयन्ती न शोकस्य तदान्तमधिगच्छति ॥ ७ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

सा स्नापयन्ती विपुलौ स्तनौ नेत्रजलस्रवैः ।
चिन्तयन्ती न शोकस्य तदान्तमधिगच्छति ॥ ७ ॥

अनुवाद (हिन्दी)

आँसुओंके प्रवाहसे अपने स्थूल उरोजोंका अभिषेक करती हुई वे चिन्तामें डूबी थीं और उस समय शोकका पार नहीं पा रही थीं ॥ ७ ॥

अनुवाद (कन्नड)

सीतादेवियु तन्न पतियन्नु स्मरिसुत्ता, कण्णिरु सुरिसुत्ता विलपिसुत्तिद्दळु. निरन्तरवागि हरियुव कण्णीरधारॆयिन्द अवळ वक्षस्थळवु तॊय्दुहोगित्तु. अवळ शोकक्कॆ अन्त्यवे इल्लदन्तायितु.॥7॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

7. tadaa = then; saa = that Seetha; snaapayantii = washing; vipulau stanau = Her wide breasts; netra jala sravaiH = with a flow of tears from eyes; * chintayantii* = (and) thinking; na adhigachchhati = did not get; antam = end; shokasya = of sorrow.

अनुवादः

Then that Seetha washing Her wide breasts with a flow of tears from eyes and thinking, did not get end of sorrow.

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

सा वेपमाना पतिता प्रवाते कदली यथा ।
राक्षसीनां भयत्रस्ता विवर्णवदनाभवत् ॥ ८ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

सा वेपमाना पतिता प्रवाते कदली यथा ।
राक्षसीनां भयत्रस्ता विवर्णवदनाभवत् ॥ ८ ॥


सा वेपमाना पतिता प्रवाते कदली यथा ।
राक्षसीनां भयत्रस्ता विषण्णवदनाभवत् ॥

मूलम् - VR

सा वेपमाना पतिता प्रवाते कदळी यथा । राक्षसीनां भयत्रस्ता विवर्णवदनाभवत् ॥ ५-२५-८

अनुवाद (हिन्दी)

प्रचण्ड वायुके चलनेपर कम्पित होकर गिरे हुए केलेके वृक्षकी भाँति वे राक्षसियोंके भयसे त्रस्त हो पृथ्वीपर गिर पड़ीं । उस समय उनके मुखकी कान्ति फीकी पड़ गयी थी ॥ ८ ॥

अनुवाद (कन्नड)

बिरुगाळिय हॊडॆतक्कॆ सिक्किद बाळॆयु नॆलक्कुरुळुवन्तॆ आ सीतादेवियु राक्षस स्त्रीयर भयदिन्द नडुगुत्ता नॆलद मेलॆ कुसिदुबिद्दळु.॥8॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

8. saa = that Seetha; vepamaanaa = was shaking; kadaLii yathaa = like a plantain tree; patitaa = fallen down; pravaate = in an exceedingly windy place; * raakshasii bhaya saMtrastaa* = trembling with fear of the ogre women; abhavat = became; vivarNavadanaa = with a pale face.

अनुवादः

That Seetha was shaking like a plantain tree fallen down in an exceedingly windy place, trembling with fear of the ogre women, and became with a pale face.

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

तस्याः सा दीर्घबहुला वेपन्त्याः सीतया तदा ।
ददृशे कम्पिता वेणी व्यालीव परिसर्पती ॥ ९ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

तस्याः सा दीर्घबहुला वेपन्त्याः सीतया तदा ।
ददृशे कम्पिता वेणी व्यालीव परिसर्पती ॥ ९ ॥


तस्याः सा दीर्घविपुला वेपन्त्या सीतया तदा ।
ददृशे कम्पिनी वेणी व्यालीव परिसर्पती ॥

मूलम् - VR

तस्याः सा दीर्घविपुला वेपन्त्या सीतया तदा । ददृशे कम्पिनी वेणी व्याळीव परिसर्पती ॥ ५-२५-९

अनुवाद (हिन्दी)

उस बेलामें काँपती हुई सीताकी विशाल एवं घनीभूत वेणी भी कम्पित हो रही थी, इसलिये वह रेंगती हुई सर्पिणीके समान दिखायी देती थी ॥ ९ ॥

अनुवाद (कन्नड)

राक्षसियर भयदिन्दागि अवळ मुखवु बहळ बाडिहोगित्तु. उद्दवागियू, दप्पवागियू इद्द सीतॆय जडॆयु डॊङ्कु-डॊङ्कागि हरिदुहोगुत्तिरुव हॆण्णुसर्पदन्तॆ अल्लाडुत्तित्तु.॥9॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

9. saa kampinii veNii = that moving plait; diirgha vipulaa = which was wide and long; tasyaaH paramstriyaaH = of that best woman; vepantyaaH = trembling; dadR^ishe = was seen (to be); vyaaLiiva = like a serpant;parisarpatii = in motion.

अनुवादः

That moving plait, which was wide and long, of that best woman was seen to be like a serpant in motion.

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

सा निःश्वसन्ती शोकार्ता कोपोपहतचेतना ।
आर्ता व्यसृजदश्रूणि मैथिली विललाप च ॥ १० ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

सा निःश्वसन्ती शोकार्ता कोपोपहतचेतना ।
आर्ता व्यसृजदश्रूणि मैथिली विललाप च ॥ १० ॥


सा निःश्वसन्ती दुःखार्ता शोकोपहतचेतना ।
आर्ता व्यसृजदश्रूणि मैथिली विललाप ह ॥

मूलम् - VR

सा निःश्वसन्ती दुःखार्ता शोकोपहतचेतना । आर्ता व्यसृजदश्रूणि मैथिली विललाप च ॥ ५-२५-१०

अनुवाद (हिन्दी)

वे शोकसे पीड़ित होकर लम्बी साँसें खींच रही थीं और क्रोधसे अचेत-सी होकर आर्तभावसे आँसू बहा रही थीं । उस समय मिथिलेशकुमारी इस प्रकार विलाप करने लगीं— ॥ १० ॥

अनुवाद (कन्नड)

सीतादेवियु तन्न पतिय अगलुविकॆयिन्द हॆच्चागि परितपिसुत्तिद्दळु. अदरल्लियू राक्षसस्त्रीयर मातुगळु शूलदन्तॆ अवळन्नु चुच्चुत्तिद्दवु. आग अवळु निट्टुसिरु बिडुत्ता, कण्णीरु सुरिसुत्ता हीगॆ विलापिसतॊडगिदळु.॥10॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

10. saa maithilii = that Seetha; duHkhaartaa = tormented by grief; * shokopahata chetanaa* = with a mind hit by sorrow; aartaa = struck by calamity; niHshvasantii = was sighing; nyasR^ijat = let down; ashruuNi = tears; vilalaapa cha = and also cried.

अनुवादः

That Seetha tormented by grief, with a mind hit by sorrow, struck by calamity was sighing and let down tears and also cried.

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

हा रामेति च दुःखार्ता हा पुनर्लक्ष्मणेति च ।
हा श्वश्रूर्मम कौसल्ये हा सुमित्रेति भामिनी ॥ ११ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

हा रामेति च दुःखार्ता हा पुनर्लक्ष्मणेति च ।
हा श्वश्रूर्मम कौसल्ये हा सुमित्रेति भामिनी ॥ ११ ॥


हा रामेति च दुःखार्ता हा पुनर्लक्ष्मणेति च ।
हा श्वश्रु मम कौसल्यॆ हा सुमित्रेति भामिनी ॥

मूलम् - VR

हा रामेति च दुःखार्ता हा पुनर्लक्ष्मणेति च । हा श्वश्रु मम कौसल्ये हा सुमित्रेति भामिनी ॥ ५-२५-११

अनुवाद (हिन्दी)

‘हा राम! हा लक्ष्मण! हा मेरी सासु कौसल्ये! हा आर्ये सुमित्रे! बारम्बार ऐसा कहकर दुःखसे पीड़ित हुई भामिनी सीता रोने-बिलखने लगीं ॥ ११ ॥

अनुवाद (कन्नड)

ऒम्मॆ दुःखार्तळागि हा रामा! ऎन्नुवळु. मत्तॊम्मॆ हा लक्ष्मणा! ऎन्नुवळु. अय्यो अत्तॆयाद कौसल्या देवी! अय्यो सुमित्रादेवी! नन्न स्थितियु हीगायितल्ल! ऎन्दु गोळाडुवळु.॥11॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

11. bhaaminii = Seetha; duHkhaartaa = being tormented by grief (said) ; haa raameti = Oh! Rama! punaH = again; haa lakshmaNeti = Oh! Lakshmana; haa kausalye = Oh! Kausalya; mama shvashru = my mother-in-law; haa sumitreti = Oh! Sumitra.

अनुवादः

Seetha being tormented by grief said : “Oh! Rama!” and again “Oh! Lakshmana!”,“Oh! Kausalya!, my mother-in-law” “Oh! Sumitra!”

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

लोकप्रवादः सत्योऽयं पण्डितैः समुदाहृतः ।
अकाले दुर्लभो मृत्युः स्त्रिया वा पुरुषस्य वा ॥ १२ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

लोकप्रवादः सत्योऽयं पण्डितैः समुदाहृतः ।
अकाले दुर्लभो मृत्युः स्त्रिया वा पुरुषस्य वा ॥ १२ ॥

अनुवाद (हिन्दी)

‘हाय! पण्डितोंने यह लोकोक्ति ठीक ही कही है कि ‘किसी भी स्त्री या पुरुषकी मृत्यु बिना समय आये नहीं होती’ ॥ १२ ॥

विश्वास-प्रस्तुतिः

यत्राहमाभिः क्रूराभी राक्षसीभिरिहार्दिता ।
जीवामि हीना रामेण मुहूर्तमपि दुःखिता ॥ १३ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

यत्राहमाभिः क्रूराभी राक्षसीभिरिहार्दिता ।
जीवामि हीना रामेण मुहूर्तमपि दुःखिता ॥ १३ ॥


यत्राहमेवं क्रूराभी राक्षसीभिरिहार्दिता ।
जीवामि हीना रामेण मुहूर्तमपि दुःखिता ॥

अनुवाद (हिन्दी)

‘तभी तो मैं श्रीरामके दर्शनसे वञ्चित तथा इन क्रूर राक्षसियोंद्वारा पीड़ित होनेपर भी यहाँ मुहूर्तभर भी जी रही हूँ ॥ १३ ॥

अनुवाद (कन्नड)

‘‘स्त्रीयरिगागली, पुरुषरिगागली, बयसिदाग मरणवु सम्भविसुवुदिल्ल’’ ऎम्ब प्राज्ञरु उदाहरिसुव हागू लोकद जनराडिकॊळ्ळुव मातु सत्यवागिये इदॆ. रामनिन्द अगलिद, ई विधवागि राक्षसस्त्रीयरु बाधॆपडिसुत्तिरुव नानु क्षण कालवादरू जीविसि इरबारदु. आदरॆ इष्टादरू नानु जीविसिद्देनल्ल! इदरिन्द पण्डितर मातु निश्चयवॆन्दे काणुत्तदॆ.॥12-13॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

12; 13. aham = I; evam = thus; aarditaa = being tormented; * kruuraabhiH raakshasiibhiH* = by cruel ogre women; iha = here; hiinaa = lacking; raameNa = Rama; duHkhaartaa = being tormented by grief; yadaa = when; jiivaami = I am living; muhuurtamapi = even for a moment; mR^ityuH = death; akaale = at wrong time; striyaaH vaa = to woman; purushhasya = or to a man; durlabhaH = is hard; samudaahR^itaH = (thus) being said;lokapravaadaH = the popular saying in the world; satyaH = is true.

अनुवादः

“I thus being tormented by cruel ogre women here lacking Rama, being tormented by grief, when I am living even for a moment,’ death at wrong time to woman or to a man is hard’ - thus being said this popular saying in the world is true.”

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

एषाल्पपुण्या कृपणा विनशिष्याम्यनाथवत् ।
समुद्रमध्ये नौः पूर्णा वायुवेगैरिवाहता ॥ १४ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

एषाल्पपुण्या कृपणा विनशिष्याम्यनाथवत् ।
समुद्रमध्ये नौः पूर्णा वायुवेगैरिवाहता ॥ १४ ॥

मूलम् - VR

एषाल्पपुण्या कृपणा विनशिष्याम्यनाथवत् । समुद्रमथ्ये नौः पूर्णा वायुवेगैरिवाहता ॥ ५-२५-१४

अनुवाद (हिन्दी)

‘मैंने पूर्वजन्ममें बहुत थोड़े पुण्य किये थे, इसीलिये इस दीन दशामें पड़कर मैं अनाथकी भाँति मारी जाऊँगी । जैसे समुद्रके भीतर सामानसे भरी हुई नौका वायुके वेगसे आहत हो डूब जाती है, उसी प्रकार मैं भी नष्ट हो जाऊँगी ॥ १४ ॥

अनुवाद (कन्नड)

सामग्रिगळिन्द तुम्बिरुव हडगु समुद्र मध्यदल्लि बिरुगाळिय बडितदिन्द मुळुगिहोगुवन्तॆ, दीनावस्थॆगॆ गुरियाद नानु शोकभारदिन्द विनाश हॊन्दुवॆनु. निजवागि नानु दुरदृष्टवन्तॆये आगिरुवॆनु.॥14॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

14. eshhaa = this me; alpapuNyaa = with small merit;kR^ipaNaa = wretched; anaathavat = like an orphan; vinashishhyaami = will perish; nauH iva = like a ship; samudramadhye = in the middle of the ocean; aahataa = being hit; vaayuvegaiH = by the speed of wind.

अनुवादः

“This me with small merit,wreched, like an orphan, will perish like a ship in the middle of the ocean being hit by the speed of wind.”

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

भर्तारं तमपश्यन्ती राक्षसीवशमागता ।
सीदामि खलु शोकेन कूलं तोयहतं यथा ॥ १५ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

भर्तारं तमपश्यन्ती राक्षसीवशमागता ।
सीदामि खलु शोकेन कूलं तोयहतं यथा ॥ १५ ॥

अनुवाद (हिन्दी)

‘मुझे पतिदेवके दर्शन नहीं हो रहे हैं । मैं इन राक्षसियोंके चंगुलमें फँस गयी हूँ और पानीके थपेड़ोंसे आहत हो कटते हुए कगारोंके समान शोकसे क्षीण होती जा रही हूँ ॥ १५ ॥

अनुवाद (कन्नड)

राक्षसियर अधीनदल्लिरुव नानु, महामहिमनाद पतियन्नु काणदॆ, जलप्रवाहदिन्द शिथिलगॊण्ड दडगळु कॊच्चिकॊण्डुहोगुवन्तॆ ई पतिविरह शोकदिन्दले विनाशहॊन्दुवॆनु.॥15॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

15. apashyantii = not seeing; bhartaaram = my husband; tam = that Rama;aagataa = obtaining; raakshasii vasham = control of ogre women; tiiram yathaa = like a bank; toyahatam = hit by water; siidaami khalu = I am verily perishing; shokena = with sorrow.

अनुवादः

“Not seeing my husband that Rama and obtaining control of ogre women like a bank hit by water I am verily perishing with sorrow.”

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

तं पद्मदलपत्राक्षं सिंहविक्रान्तगामिनम् ।
धन्याः पश्यन्ति मे नाथं कृतज्ञं प्रियवादिनम् ॥ १६ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

तं पद्मदलपत्राक्षं सिंहविक्रान्तगामिनम् ।
धन्याः पश्यन्ति मे नाथं कृतज्ञं प्रियवादिनम् ॥ १६ ॥

मूलम् - VR

तं पद्मदळपत्राक्षं सिंहविक्रान्तगामिनम् । धन्याः पश्यन्ति मे नाथं कृतज्ञं प्रियवादिनम् ॥ ५-२५-१६

अनुवाद (हिन्दी)

‘आज जिन लोगोंको सिंहके समान पराक्रमी और सिंहकी-सी चालवाले मेरे कमलदललोचन, कृतज्ञ और प्रियवादी प्राणनाथके दर्शन हो रहे हैं, वे धन्य हैं ॥ १६ ॥

अनुवाद (कन्नड)

नन्न पतियाद श्रीरामनु पद्मदळायनेत्रनू, सिंहदन्तॆ पराक्रमशालियू हागू गम्भीर नडॆयुळ्ळवनू, कृतज्ञनू, प्रियवागि माताडुववनू आद आ प्रभुवन्नु दर्शिसुववरे धन्यरु.॥16॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

16. dhanyaaH = (only) fortunate; pashyanti = see; tam = that; me = my; naatham = husband; padmadaLapatraaksham = with eyes like petals of an expanded lotus; siMha vikraanta gaaminam = walking with the gait of a lion; kR^itajJNam = correct in conduct; priyavaadiam = pleasant talker;

अनुवादः

“Only fortunate see that my husband with eyes like petals of an expanded lotus, walking with the gait of a lion, correct in conduct and a pleasant talker.”

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

सर्वथा तेन हीनाया रामेण विदितात्मना ।
तीक्ष्णं विषमिवास्वाद्य दुर्लभं मम जीवनम् ॥ १७ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

सर्वथा तेन हीनाया रामेण विदितात्मना ।
तीक्ष्णं विषमिवास्वाद्य दुर्लभं मम जीवनम् ॥ १७ ॥


सर्वथा तेन हीनाया रामेण विदितात्मना ।
तीक्ष्णं विषमिवास्वाद्य दुर्लभं मम जीवितम् ॥

अनुवाद (हिन्दी)

‘उन आत्मज्ञानी भगवान् श्रीरामसे बिछुड़कर मेरा जीवित रहना उसी तरह सर्वथा दुर्लभ है, जैसे तेज विषका पान करके किसीका भी जीना अत्यन्त कठिन हो जाता है ॥ १७ ॥

अनुवाद (कन्नड)

सद्गुणसम्पन्ननू, जगद्विख्यातनू आद श्रीरामनिन्द अगलिदवळाद नानु-तीक्ष्णवाद विषवन्नु कुडिदवनु हॆच्चु काल जीविसिरलारनो हागॆये हॆच्चुकाल बदुकिरलारॆनु.॥17॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

17. mama = to me; hiinaayaaH = lacking; tena = that Rama; * viditaatmanaa* = with a famous soul; aasvaadyeva = like after eating; tiikshNam vishham = a pungent poison; jiivitam = life; sarvathaa = in all ways; durlabham = is hard.

अनुवादः

“To me lacking that Rama with a famous soul, like after eating a pungent poison life in all ways is hard.”

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

कीदृशं तु महापापं मया देहान्तरे कृतम् ।
तेनेदं प्राप्यते घोरं महादुःखं सुदारुणम् ॥ १८ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

कीदृशं तु महापापं मया देहान्तरे कृतम् ।
तेनेदं प्राप्यते घोरं महादुःखं सुदारुणम् ॥ १८ ॥


कीदृशं तु मया पापं पुरा जन्मान्तरे कृतम् ।
येनेदं प्राप्यते दुःखं मयाघोरं सुदारुणम् ॥

मूलम् - VR

कीदृशं तु महापापं मया जन्मान्तरे कृतम् । येनेदं प्राप्यते दुःखं मया घोरं सुदारुणं ॥ ५-२५-१८

अनुवाद (हिन्दी)

‘पता नहीं, मैंने पूर्वजन्ममें दूसरे शरीरसे कैसा महान् पाप किया था, जिससे यह अत्यन्त कठोर, घोर और महान् दुःख मुझे प्राप्त हुआ है? ॥ १८ ॥

अनुवाद (कन्नड)

नानु पूर्वजन्मदल्लि ऎन्तह महापापवन्नु माडिरुवॆनो तिळियदु. अदरिन्दले ईग ननगॆ भयङ्करवाद, अति दारुणवाद इन्तह स्थितियु उण्टागिदॆ.॥18॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

18. yena = by what; mayaa = by me; praapyate = obtaining; * idam* = this; duHkham = grief; ghoram = which is horrible;sudaaruNam = very dreadful; kiidR^isham = what kind of; mahaa paapam = great sin;kR^itam = has been done; mayaa = by me; janmaantare = in an other life.

अनुवादः

“By what this horrible and very dreadful grief is obtained by me, what kind of great sin had been done by me in another life.”

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

जीवितं त्यक्तुमिच्छामि शोकेन महता वृता ।
राक्षसीभिश्च रक्षन्त्या रामो नासाद्यते मया ॥ १९ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

जीवितं त्यक्तुमिच्छामि शोकेन महता वृता ।
राक्षसीभिश्च रक्षन्त्या रामो नासाद्यते मया ॥ १९ ॥

मूलम् - VR

जीवितं त्यक्तुंइच्छामि शोकेन महता वृता । राक्षसीभिश्च रक्ष्यन्त्या रामो नासाद्यते मया ॥ ५-२५-१९

अनुवाद (हिन्दी)

‘इन राक्षसियोंके संरक्षणमें रहकर तो मैं अपने प्राणाराम श्रीरामको कदापि नहीं पा सकती, इसलिये महान् शोकसे घिर गयी हूँ और इससे तंग आकर अपने जीवनका अन्त कर देना चाहती हूँ ॥ १९ ॥

अनुवाद (कन्नड)

राक्षस स्त्रीयर अधीनदल्लिरुव नानु श्रीरामनन्नु सेरलारॆनु. आदुदरिन्द इन्तह विरह शोकदिन्द सङ्कटपडुत्तिरुव नानु जीवनवन्नु मुगिसुवुदे युक्तवु.॥19॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

19. vR^itaa = together; mahataa shokena = with great grief; ichchhaami = I desire; tyaktum = to give away; jiivitum = life; kaamaH = (this) desire; na avaapyate = is not obtainable; mayaa = by me; surakshitaa = I am well protected; raakshasiibhiH = by ogre women.

अनुवादः

“Together with great grief, I desire to give away my life. This desire is not obtainable by me. I am well protected by ogre women.”

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

धिगस्तु खलु मानुष्यं धिगस्तु परवश्यताम् ।
न शक्यं यत् परित्यक्तुमात्मच्छन्देन जीवितम् ॥ २० ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

धिगस्तु खलु मानुष्यं धिगस्तु परवश्यताम् ।
न शक्यं यत् परित्यक्तुमात्मच्छन्देन जीवितम् ॥ २० ॥

अनुवाद (हिन्दी)

‘इस मानव-जीवन और परतन्त्रताको धिक्कार है, जहाँ अपनी इच्छाके अनुसार प्राणोंका परित्याग भी नहीं किया जा सकता’ ॥ २० ॥

अनुवाद (कन्नड)

नन्न जीवितवु नन्न पतियाद श्रीरामन अधीनवागिदॆ. भर्तृशरीरवाद इदन्नु इष्टानुसारवागि त्यजिसलु ननगॆ अधिकारविल्ल. मनुष्यत्ववु पापपुण्यगळन्नु विङ्गडिसुवल्लि विचक्षणवाद विवेकयुतवागिदॆ. अदरिन्द ई जीवितवन्नु त्यजिसुवुदक्कॆ ननगॆ अवकाशविल्ल.*॥20॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

20. dhik astu = fie; maanushhyam = upon human condition; dhik astu = fie; paravashyataam = upon being in the control of others; yat = by what reason; aatmachchhandena = according to own desire; na shakyam = it is not possible; parityaktum = to give up; jiivitam = life.

अनुवादः

“Fie upon human condition! Fie upon being in the control of others. By what reason it is not possible according to own desire to give up life.”

स्रोतः: valmikiramayan.net

समाप्तिः

इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डे पञ्चविंशः सर्गः ॥ २५ ॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके सुन्दरकाण्डमें पचीसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ २५ ॥

अनुवाद (समाप्तिः) (कन्नड)

महर्षिवाल्मीकि विरचित आदिकाव्यवाद श्रीमद्रामायणद सुन्दरकाण्डदल्लि इप्पत्तैदनॆय सर्गवु मुगियितु.