००३ लङ्कागमनम्

वाचनम्
सर्वाष् टीकाः
Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy - Intro

Book V : Sundara Kanda - Book Of Beauty

In this chapter Hanuma faces Lanka, the city of Lanka herself in the form of a demoness.

स्रोतः: valmikiramayan.net

भागसूचना
  1. लंकापुरीका अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, उसमें प्रवेश करते समय निशाचरी लंकाका उन्हें रोकना और उनकी मारसे विह्वल होकर उन्हें पुरीमें प्रवेश करनेकी अनुमति देना
विश्वास-प्रस्तुतिः

स लम्बशिखरे लम्बे लम्बतोयदसन्निभे ।
सत्त्वमास्थाय मेधावी हनुमान् मारुतात्मजः ॥ १ ॥
निशि लङ्कां महासत्त्वो विवेश कपिकुञ्जरः ।
रम्यकाननतोयाढ्यां पुरीं रावणपालिताम् ॥ २ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

स लम्बशिखरे लम्बे लम्बतोयदसन्निभे ।
सत्त्वमास्थाय मेधावी हनुमान् मारुतात्मजः ॥ १ ॥
निशि लङ्कां महासत्त्वो विवेश कपिकुञ्जरः ।
रम्यकाननतोयाढ्यां पुरीं रावणपालिताम् ॥ २ ॥

मूलम् - VR

स लम्ब शिखरे लम्बे लम्ब तोयद सम्निभे । सत्त्वम् आस्थाय मेधावी हनुमान् मारुत आत्मजः ॥ ५-३-१ निशि लन्काम् महा सत्त्वः विवेश कपि कुन्जरः । रम्य कानन तोय आढ्याम् पुरीम् रावण पालिताम् ॥ ५-३-२

अनुवाद (हिन्दी)

ऊँचे शिखरवाले लंब (त्रिकूट) पर्वतपर जो महान् मेघोंकी घटाके समान जान पड़ता था, बुद्धिमान् महाशक्तिशाली कपिश्रेष्ठ पवनकुमार हनुमान् ने सत्त्व-गुणका आश्रय ले रातके समय रावणपालित लंकापुरीमें प्रवेश किया । वह नगरी सुरम्य वन और जलाशयोंसे सुशोभित थी ॥ १-२ ॥

अनुवाद (कन्नड)

हॆच्चिन प्रज्ञाशालियू, वायुसुतनू, महाबल सम्पन्ननाद कपिश्रेष्ठनु ऎत्तरवाद शिखरदिन्द इळिदु, जोलाडुत्तिरुव मेघदोपादियल्लिद्द विस्तीर्णवाद लम्ब (त्रिकूट) पर्वतद शिखरदल्लि, रम्यवाद अरण्यगळिन्द समावृतवागिद्द, जलसमृद्धियिन्द कूडिद, रावणनिन्द पालितवाद लङ्कापट्टणवन्नु धैर्यदिन्द रात्रियल्लि प्रवेशिसिदनु. ॥1-2॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

1;2. saH = That; hanumaan = Hanuma; medhaavii = the intellectual; maarutaatmajaH = son of God of Wind; mahaasattvaH = one with great might; kapikunjaraH = best among monkeys; lambe = on the mountain called Lamba; lamba shikhare = with high peaks; lambatoyada sannibhe = equalling a high cloud; aasthaaya = gathered; sattvam = courage; vivesha = and entered; nishi = at night; laN^kaam puriim = the city of Lanka; raavaNa paalitaam = ruled by Ravana; ramya kaanana toyaaDhyaam = and filled with beautiful forests and (places of) water.

अनुवादः

That Hanuma, best among monkeys, the intellectual son of Vayu, one with great might, stood on the moutain called Lamba with its high peaks equalling a high cloud, gathered courage and entered at night the city of Lanka ruled by Ravana and filled with beautiful forests and places of water such as lakes.

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

शारदाम्बुधरप्रख्यैर्भवनैरुपशोभिताम् ।
सागरोपमनिर्घोषां सागरानिलसेविताम् ॥ ३ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

शारदाम्बुधरप्रख्यैर्भवनैरुपशोभिताम् ।
सागरोपमनिर्घोषां सागरानिलसेविताम् ॥ ३ ॥

अनुवाद (हिन्दी)

शरत्कालके बादलोंकी भाँति श्वेत कान्तिवाले सुन्दर भवन उसकी शोभा बढ़ाते थे । वहाँ समुद्रकी गर्जनाके समान गम्भीर शब्द होता रहता था । सागरकी लहरोंको छूकर बहनेवाली वायु इस पुरीकी सेवा करती थी ॥ ३ ॥

अनुवाद (कन्नड)

आ लङ्कानगरवु शरत्कालद मेघगळन्तॆ श्वेतभवनगळिन्द शोभायमानवागित्तु. समुद्र घोषवन्नु मीरि राक्षसर भयङ्कर ध्वनिगळिन्द तुम्बि होगित्तु. समुद्रद मेलिनिन्द बीसुवन्तह गाळियु ऎल्लॆडॆ बीसुतित्तु.॥3॥

विश्वास-प्रस्तुतिः

सुपुष्टबलसम्पुष्टां यथैव विटपावतीम् ।
चारुतोरणनिर्यूहां पाण्डुरद्वारतोरणाम् ॥ ४ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

सुपुष्टबलसम्पुष्टां यथैव विटपावतीम् ।
चारुतोरणनिर्यूहां पाण्डुरद्वारतोरणाम् ॥ ४ ॥


सुपुष्टबलसङ्घुष्टां यथैव विटपावतीम् ।
चारुतोरणनिर्यूहां पाण्डरद्वारतोरणाम् ॥ भुजगाचरितां गुप्तां शुभां भोगवतीमिव ।
तां सविद्युद्घनाकीर्णां ज्योतिर्गणनिषेविताम् ॥

अनुवाद (हिन्दी)

वह अलकापुरीके समान शक्तिशालिनी सेनाओंसे सुरक्षित थी । उस पुरीके सुन्दर फाटकोंपर मतवाले हाथी शोभा पाते थे । उस पुरीके अन्तर्द्वार और बहिर्द्वार दोनों ही श्वेत कान्तिसे सुशोभित थे ॥ ४ ॥

अनुवाद (कन्नड)

अल्लि पुष्टराद सैनिकर जयघोषगळु केळिबरुत्तिद्दुवु. सुन्दरवाद तोरणगळिन्द कूडिद गोपुरगळिद्दुवु. महाद्वारदल्लि बिळुपाद तोरणवन्नु हॊन्दिद्दु, अलकापुरिगॆ समानवागिद्द लङ्कापट्टणवन्नु हनुमन्तनु सुत्तलू नोडिदनु.॥4॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

3;4. upashobhitaam = (city of Lanka was) shone; bhavanaiH = by buildings; shaaradaambhudhara prakhyaiH = equalling autumnal clouds; saagaropama nirghoshhaam = with a sound resembling that of an ocean; saagara anila sevitaam = served by ocean breeze; supushhTa bala saMpushhTaam = filled by mighty armies; yathaiva = like; viTapaavatiim = Vitapavati; chharu toraNa niryuuhaam = with elephants standing at archways; paaNDuradvaara toraNaam = with white gates and archways.

अनुवादः

The city of Lanka was shone by buildings equalling autumnal clouds. With a sound resembling that of an ocean, it was served by ocean breeze. It was filled with well fed and mighty armies like Vitapati, the capital of Kubera. It had elephants positioned at archways and had white gates and archways.

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

भुजगाचरितां गुप्तां शुभां भोगवतीमिव ।
तां सविद्युद‍्घनाकीर्णां ज्योतिर्गणनिषेविताम् ॥ ५ ॥
चण्डमारुतनिर्ह्रादां यथा चाप्यमरावतीम् ।

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

भुजगाचरितां गुप्तां शुभां भोगवतीमिव ।
तां सविद्युद‍्घनाकीर्णां ज्योतिर्गणनिषेविताम् ॥ ५ ॥
चण्डमारुतनिर्ह्रादां यथा चाप्यमरावतीम् ।

अनुवाद (हिन्दी)

उस नगरीकी रक्षाके लिये बड़े-बड़े सर्पोंका संचरण (आना-जाना) होता रहता है, इसलिये वह नागोंसे सुरक्षित सुन्दर भोगवतीपुरीके समान जान पड़ती थी । अमरावतीपुरीके समान वहाँ आवश्यकताके अनुसार बिजलियोंसहित मेघ छाये रहते थे । ग्रहों और नक्षत्रोंके सदृश विद्युत्-दीपोंके प्रकाशसे वह पुरी प्रकाशित थी तथा प्रचण्ड वायुकी ध्वनि वहाँ सदा होती रहती थी ॥ ५ १/२ ॥

अनुवाद (कन्नड)

सर्पगळ सञ्चारवुळ्ळ हागू सर्पगळ पट्टणवाद भोगवति (पाताळ)यन्तॆये लङ्कापट्टणवु राक्षसरिन्द रक्षितवागित्तु. अदु इन्द्रन अमरावतियन्तॆ, मिञ्चिनिन्द कूडिद मेघगळिन्द व्याप्तवाद नक्षत्र मण्डलदन्तॆ शोभिसुतित्तु. अल्लि तङ्गाळियु बीसुतिद्दु, सकल वैभवदिन्द विराजमानवागित्तु.॥5॥

विश्वास-प्रस्तुतिः

शातकुम्भेन महता प्राकारेणाभिसंवृताम् ॥ ६ ॥
किङ्किणीजालघोषाभिः पताकाभिरलङ्कृताम् ।

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

शातकुम्भेन महता प्राकारेणाभिसंवृताम् ॥ ६ ॥
किङ्किणीजालघोषाभिः पताकाभिरलङ्कृताम् ।


मन्दमारुतसञ्चारां यथा चाप्यमरावतीम् ।
शातकुम्भेन महता प्राकारेणाभिसंवृताम् ॥

अनुवाद (हिन्दी)

सोनेके बने हुए विशाल परकोटेसे घिरी हुई लंकापुरी क्षुद्र घंटिकाओंकी झनकारसे युक्त पताकाओंद्वारा अलंकृत थी ॥ ६ १/२ ॥

अनुवाद (कन्नड)

आ लङ्कापुरियु ऎत्तरवाद सुवर्णमय प्राकारगळिन्द सुत्तुवरियल्पट्टित्तु. शब्द माडुत्तिद्द किरु गण्टॆगळिन्द कूडिद्द पताकॆगळिन्द समलङ्कृतवागित्तु.॥6॥

विश्वास-प्रस्तुतिः

आसाद्य सहसा हृष्टः प्राकारमभिपेदिवान् ॥ ७ ॥
विस्मयाविष्टहृदयः पुरीमालोक्य सर्वतः ।

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

आसाद्य सहसा हृष्टः प्राकारमभिपेदिवान् ॥ ७ ॥
विस्मयाविष्टहृदयः पुरीमालोक्य सर्वतः ।

अनुवाद (हिन्दी)

उस पुरीके समीप पहुँचकर हर्ष और उत्साहसे भरे हुए हनुमान् जी सहसा उछलकर उसके परकोटेपर चढ़ गये । वहाँ सब ओरसे लंकापुरीका अवलोकन करके हनुमान् जी का चित्त आश्चर्यसे चकित हो उठा ॥ ७ १/२ ॥

अनुवाद (कन्नड)

अन्तह लङ्कापट्टणद प्राकारवन्नु सेरि हनुमन्तनु परमहृष्टनागि हारि मेलॆ कुळितनु. अल्लिन्द नगरद ऎल्ल भागगळन्नु नोडि अत्यन्त विस्मितनादनु.॥7॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

5;6;7. sahasaa = quickly; aasaadya = approaching; taam = that Lanka; bhujagaacharitaam = with serpants moving about; guptaam = and being protected by them; shubhaam bhogavatiimiva = like auspicious city of Bhogavati; savidyudghanaakiirNaam = spread with lightening clouds; jyotirmaarga nishhevitaam = served by pathway of stars; manda maaruta saMchaaraam = with a light breeze; indrasya amaraavatiim yathaa = like Indra’s city of Amaravati; abhisaMVR^itaam = surrounded; mahataa praakaareNa = by a city wall; shaatakumbhena = with a golden hue; * alaMkR^itaam* = decorated; pataakaabhiH = by flags; kinkiNii jaala ghoshhaabhiH = with sounds from groups of bells; hrishhTaH = became happy; ahipedivaan = and obtained; praakaaram = the wall.

अनुवादः

Quickly approaching that city of Lanka which was protected by Rakshasas, like the the auspicious city of Bhogavati being protected by serpents moving about, spread with cloud illumined by flashes of lightening, served by pathways of stars, witha light breeze like the Indra’s city of Amaravati, surrounded by a wall with a golden hue, decorated by flags with sounds from groups of small bells. He became happy and leapt up the wall.

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

जाम्बूनदमयैर्द्वारैर्वैदूर्यकृतवेदिकैः ॥ ८ ॥
वज्रस्फटिकमुक्ताभिर्मणिकुट्टिमभूषितैः ।
तप्तहाटकनिर्यूहै राजतामलपाण्डुरैः ॥ ९ ॥
वैदूर्यकृतसोपानैः स्फाटिकान्तरपांसुभिः ।
चारुसञ्जवनोपेतैः खमिवोत्पतितैः शुभैः ॥ १० ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

जाम्बूनदमयैर्द्वारैर्वैदूर्यकृतवेदिकैः ॥ ८ ॥
वज्रस्फटिकमुक्ताभिर्मणिकुट्टिमभूषितैः ।
तप्तहाटकनिर्यूहै राजतामलपाण्डुरैः ॥ ९ ॥
वैदूर्यकृतसोपानैः स्फाटिकान्तरपांसुभिः ।
चारुसञ्जवनोपेतैः खमिवोत्पतितैः शुभैः ॥ १० ॥


जाम्बूनदमयैर्द्वारैर्वैडूर्यकृतवेदिकैः । तप्तहाटकनिर्यूहै राजतामलपाण्डरैः । वैडूर्यतलसोपानैः स्फाटिकान्तरपांसुभिः ।

अनुवाद (हिन्दी)

सुवर्णके बने हुए द्वारोंसे उस नगरीकी अपूर्व शोभा हो रही थी । उन सभी द्वारोंपर नीलमके चबूतरे बने हुए थे । वे सब द्वार हीरों, स्फटिकों और मोतियोंसे जड़े गये थे । मणिमयी फर्शें उनकी शोभा बढ़ा रही थीं । उनके दोनों ओर तपाये सुवर्णके बने हुए हाथी शोभा पाते थे । उन द्वारोंका ऊपरी भाग चाँदीसे निर्मित होनेके कारण स्वच्छ और श्वेत था । उनकी सीढ़ियाँ नीलमकी बनी हुई थीं । उन द्वारोंके भीतरी भाग स्फटिक मणिके बने हुए और धूलसे रहित थे । वे सभी द्वार रमणीय सभा-भवनोंसे युक्त और सुन्दर थे तथा इतने ऊँचे थे कि आकाशमें उठे हुए-से जान पड़ते थे ॥ ८—१० ॥

अनुवाद (कन्नड)

लङ्कानगरिय सौधगळ बागिलुगळॆल्लवू सुवर्णमयवागिद्दुवु. वैडूर्यदिन्दले निर्मितवाद जगुलिगळिद्दवु. वज्रगळिन्दलू, स्फटिकगळिन्दलू, मुत्तुगळिन्दलू, मणिगळिन्दलू कूडिद नॆलगळिन्द समलङ्कृतवागिद्दुवु. सौधगळु पुटविट्ट भङ्गारदिन्द निर्मितवाद गोपुरगळिन्द कूडिद्दु, हॊरभागवु परिशुद्धवाद बॆळ्ळियन्तॆ बिळुपागिद्दवु. वैडूर्यदिन्दले निर्मितवाद सोपानगळिन्द (महडि मॆट्टलु) कूडिद्दवु. स्फटिकमयवाद ऒळ अङ्गणगळु धूळुरहितवागिद्दुवु. रमणीयवाद चतुःशालगळिन्द (सभाभवनगळु) परिशोभिसुत्तिद्दुवु. अवुगळु हॆच्चु ऎत्तरवागिद्दु अम्बरवन्नु चुम्बिसुत्तिरुवन्तॆ काणुत्तिद्दु शुभावहगळागिद्दवु.॥8-10॥

विश्वास-प्रस्तुतिः

क्रौञ्चबर्हिणसङ्घुष्टै राजहंसनिषेवितैः ।
तूर्याभरणनिर्घोषैः सर्वतः परिनादिताम् ॥ ११ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

क्रौञ्चबर्हिणसङ्घुष्टै राजहंसनिषेवितैः ।
तूर्याभरणनिर्घोषैः सर्वतः परिनादिताम् ॥ ११ ॥


क्रौञ्चबर्हिणसङ्घुष्टै राजहंसनिषेवितैः ।
तूर्याभरणनिर्घोषैः सर्वतः प्रतिनादिताम् ॥

अनुवाद (हिन्दी)

वहाँ क्रौञ्च और मयूरोंके कलरव गूँजते रहते थे, उन द्वारोंपर राजहंस नामक पक्षी भी निवास करते थे । वहाँ भाँति-भाँतिके वाद्यों और आभूषणोंकी मधुर ध्वनि होती रहती थी, जिससे लंकापुरी सब ओरसे प्रतिध्वनित हो रही थी ॥ ११ ॥

विश्वास-प्रस्तुतिः

वस्वोकसारप्रतिमां समीक्ष्य नगरीं ततः ।
खमिवोत्पतितां लङ्कां जहर्ष हनुमान् कपिः ॥ १२ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

वस्वोकसारप्रतिमां समीक्ष्य नगरीं ततः ।
खमिवोत्पतितां लङ्कां जहर्ष हनुमान् कपिः ॥ १२ ॥


वस्वोकसाराप्रतिमां समीक्ष्य नगरीं ततः ।
खमिवोत्पतितां लङ्कां जहर्ष हनुमान् कपिः ॥

अनुवाद (हिन्दी)

कुबेरकी अलकाके समान शोभा पानेवाली लंकानगरी त्रिकूटके शिखरपर प्रतिष्ठित होनेके कारण आकाशमें उठी हुई-सी प्रतीत होती थी । उसे देखकर कपिवर हनुमान् को बड़ा हर्ष हुआ ॥ १२ ॥

अनुवाद (कन्नड)

अल्लिय उद्यानवनगळल्लि क्रौञ्चपक्षिगळू, नविलुगळू निनाद माडुत्तिद्दुवु. सरोवरगळल्लि राजहंसगळु वासवागिद्दुवु. मङ्गळवाद्यगळ घोषगळू, आभरणगळ किणि-किणिध्वनिगळू नगरद ऎल्लॆडॆ केळिबरुत्तिद्दुवु. कुबेरन अलकापुरिगॆ समानवागि शोभिसुत्ता त्रिकूट पर्वतद शिखरदल्लिद्दुदरिन्द आ पट्टणवु आकाशक्कॆ नॆगॆयलु सिद्धवागिदॆयो ऎम्बन्तॆ ऎद्दु काणुत्तित्तु. अन्तह अत्यन्त सुन्दरवाद लङ्कॆयन्नु नोडि हनुमन्तनु हॆच्चिन सन्तसगॊण्डनु.॥11-12॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

8;9;10;11;12. aalokya = seeing; puriim = the city; sarvataH = everywhere; vismayaavishhTa hR^idayaH = (Hanuma) became surprised at heart; tataH = thereafter; kapiH hanumaan = Hanuma; the monkey; jaharshha = became happy; viikshya = seeing; dvaaraiH = with doors; jaambuunadamayaiH = which were golden hued; vaiDurrya kR^ita vedikaiH = with platforms of cat’s eye gems; vajrasphatikamuktaabhiH = inlaid with diamonds; crystals and pearls; maNi kuttima bhuushhitaiH = embellished with floors of gems; taptahaaTakaniryuuhaiH = graced with elephants made of refined gold; raajataamal paaNDuraiH = crowned with spotless white silver; * vaiduurya kR^ita sopaanaiH* = stairs studded with cat’s eye gems; sphaaTikaantarapaaMsubhiH = with inside walls made of crystal free from dust; chaarusaMja vanopetaiH = provided with lovely assembly halls; krauncha barhiNa saMghashhTaiH = with sounds of Krauncha birds and peacocks; raajahaMsa nishevitaiH = served by royal swans; utpatitairiva = as though flying; kham = towards the sky; shubhaiH = with auspicious houses; prati naaditaam = resounding; sarvataH = everywhere; tuuryaabharaNa nirghoshhaiH = with the sounds of clarionets and ornaments; vasvaukasaaraapratimaam = equalling the city of Vasvaukasaara; utpatitaam iva = as though flying; kham = towards sky.

अनुवादः

Seeing the city everywhere Hanuma became surprised at heart. Thereafter Hanuma the monkey, became happy seeing the doors which were of golden color, with platforms of cat’s eye gems, inlaid with diamonds, crystals and pearls, embellished with floors of gems, graced with elephants made of refined gold, crowned with spotless white silver, stairs studded with cat’s eye gems, with inside walls made of crystal free from dust, provided with lovely assembly halls, with sounds of Krauncha birds and peacocks, served by royal swans, looking as though flying toward the sky, with auspicious houses resounding everywhere with the sounds of clarionets and ornaments, equalling the city of Vasvaukasaara, as though flying towards the sky.

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

तां समीक्ष्य पुरीं लङ्कां राक्षसाधिपतेः शुभाम् ।
अनुत्तमामृद्धिमतीं चिन्तयामास वीर्यवान् ॥ १३ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

तां समीक्ष्य पुरीं लङ्कां राक्षसाधिपतेः शुभाम् ।
अनुत्तमामृद्धिमतीं चिन्तयामास वीर्यवान् ॥ १३ ॥

मूलम् - VR

ताम् समीक्ष्य पुरीम् लन्काम् राक्षस अधिपतेः शुभाम् । अनुत्तमाम् ऋद्धि युताम् चिन्तयाम् आस वीर्यवान् ॥ ५-३-१३

अनुवाद (हिन्दी)

राक्षसराजकी वह सुन्दर पुरी लंका सबसे उत्तम और समृद्धिशालिनी थी । उसे देखकर पराक्रमी हनुमान् इस प्रकार सोचने लगे— ॥ १३ ॥

अनुवाद (कन्नड)

अत्युत्तमवाद, सकल सम्पत्तिनिन्द समृद्धवाद, सुन्दरवू, मङ्गळप्रदवू आद राक्षसाधिपति रावणन आ पट्टणवन्नु नोडि महापराक्रमियाद मारुतियु आलोचिस तॊडगिदनु.॥13॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

13. samiikshya = seeing; taam puriim = that city; raakshsaadhipateH = of the king of rakshasas; anuttamam = best one; buddhiyutaam = with wealth; ramyaam = beautiful one; shubhaam = auspicious one; viiryavaan = that powerful Hanuma; chintayaamaasa = thought (thus).

अनुवादः

Seeing that city of Ravana, which was best among cities, a wealthy city, a beautiful and auspicious city, that powerful Hanuma thought thus.

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

नेयमन्येन नगरी शक्या धर्षयितुं बलात् ।
रक्षिता रावणबलैरुद्यतायुधपाणिभिः ॥ १४ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

नेयमन्येन नगरी शक्या धर्षयितुं बलात् ।
रक्षिता रावणबलैरुद्यतायुधपाणिभिः ॥ १४ ॥


नेयमन्येन नगरी शक्या धर्षयितुं बलात् ।
रक्षिता रावणबलैरुद्यतायुधधारिभिः ॥

मूलम् - VR

न इयम् अन्येन नगरी शक्या धर्षयितुम् बलात् । रक्षिता रावण बलैः उद्यत आयुध धारिभिः ॥ ५-३-१४

अनुवाद (हिन्दी)

‘रावणके सैनिक हाथोंमें अस्त्र-शस्त्र लिये इस पुरीकी रक्षा करते हैं, अतः दूसरा कोई बलपूर्वक इसे अपने काबूमें नहीं कर सकता ॥ १४ ॥

अनुवाद (कन्नड)

‘‘आयुधगळन्नु मेलॆत्ति हिडिदु युद्धक्कॆ सज्जागि निन्तिरुव रावणन सैनिकरिन्द ऎल्ल कालदल्लियू रक्षिसुत्तिरुव ई लङ्कापट्टणवन्नु बेरॆ यारिन्दलू बलपूर्वकवागि आक्रमिसलु साध्यवागदु.॥14॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

14. na shakyaa = (it is) not possible; dharshhayitum = to oppose; balaat = by strength; anyena = by anyone else; iyam nagarii = this city; rakshitaa = guarded; raavaNa balaiH = by armies of Ravana; udyataayudha dhaaribhiH = with raised weapons.

अनुवादः

“It is not possible for anyone else to oppose this city, by strength alone, which is being guarded by armies of Ravana with raised weapons.”

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

कुमुदाङ्गदयोर्वापि सुषेणस्य महाकपेः ।
प्रसिद्धेयं भवेद् भूमिर्मैन्दद्विविदयोरपि ॥ १५ ॥
विवस्वतस्तनूजस्य हरेश्च कुशपर्वणः ।
ऋक्षस्य कपिमुख्यस्य मम चैव गतिर्भवेत् ॥ १६ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

कुमुदाङ्गदयोर्वापि सुषेणस्य महाकपेः ।
प्रसिद्धेयं भवेद् भूमिर्मैन्दद्विविदयोरपि ॥ १५ ॥
विवस्वतस्तनूजस्य हरेश्च कुशपर्वणः ।
ऋक्षस्य कपिमुख्यस्य मम चैव गतिर्भवेत् ॥ १६ ॥


कुमुदाङ्गदयोर्वापि सुषेणस्य महाकपेः ।
प्रसिद्धेयं भवेद्भूमिर्मैन्दद्विविदयोरपि ॥ विवस्वतस्तनूजस्य हरेश्च कुशपर्वणः ।
ऋक्षस्य केतुमालस्य मम चैव गतिर्भवेत् ॥

मूलम् - VR

कुमुद अन्गदयोः वा अपि सुषेणस्य महा कपेः । प्रसिद्धा इयम् भवेत् भूमिः मैन्द द्विविदयोः अपि ॥ ५-३-१५ विवस्वतः तनूजस्य हरेः च कुश पर्वणः । ऋक्षस्य केतु मालस्य मम चैव गतिः भवेत् ॥ ५-३-१६

अनुवाद (हिन्दी)

‘केवल कुमुद, अंगद, महाकपि सुषेण, मैन्द, द्विविद, सूर्यपुत्र सुग्रीव, वानर कुशपर्वा और वानरसेनाके प्रमुख वीर ऋक्षराज जाम्बवान् की तथा मेरी भी पहुँच इस पुरीके भीतर हो सकती है’ ॥ १५-१६ ॥

अनुवाद (कन्नड)

इदन्नु कुमुद, वालीपुत्र अङ्गद, महाकपियाद सुषेण, मैन्द, द्विविद, सूर्यपुत्रनाद सुग्रीव, कुशपर्व, ऋक्षराज जाम्बवन्त, केतुमालि मत्तु नानु इष्टु मन्दिगॆ मात्र प्रवेशिसलु साध्यवागबहुदु.’’॥15-16॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

15. iyam = this; bhuumiH = land; prasiddhaa bhavet = may become conquerable; kumuda angadayorvaapi = to Kumuda or Angada; mahaa kapeH sushheNasya = to the great monkey Sushena; mainda dvividayorapi = to Mainda or Dvivida.

अनुवादः

This land may be conquerable by Kumuda or Angada, to the great monkey Sushena or to Mainda or Dvivida.

स्रोतः: valmikiramayan.net

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

16. gatiH bhavet = there may be access; vivasvataH tanuujasya = to son of Sun God - Sugreeva; hareH = the monkey; kushaparvaNaH = Kusaparvana; kapi mukhyasya R^ikshasa = to the chief among monkeys Riksha; mama cha eva = and to me.

अनुवादः

There may be access to this land to the son of Sun God Sugreeva, to the monkey Kusaparvana, to the chief among monkeys Riksha and to me.

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

समीक्ष्य च महाबाहो राघवस्य पराक्रमम् ।
लक्ष्मणस्य च विक्रान्तमभवत् प्रीतिमान् कपिः ॥ १७ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

समीक्ष्य च महाबाहो राघवस्य पराक्रमम् ।
लक्ष्मणस्य च विक्रान्तमभवत् प्रीतिमान् कपिः ॥ १७ ॥

मूलम् - VR

समीक्ष्य तु महा बाहः राघवस्य पराक्रमम् । लक्ष्मणस्य च विक्रान्तम् अभवत् प्रीतिमान् कपिः ॥ ५-३-१७

अनुवाद (हिन्दी)

फिर महाबाहु श्रीराम और लक्ष्मणके पराक्रमका विचार करके कपिवर हनुमान् को बड़ी प्रसन्नता हुई ॥ १७ ॥

अनुवाद (कन्नड)

बळिक हनुमन्तनु स्वल्प हॊत्तु हागॆये योचिसुत्तिद्दु महाबाहुवाद श्रीरामन मत्तु लक्ष्मणन अतुल पराक्रमगळन्नु नॆनॆदु (लङ्कॆयु ऎन्तहुदे इरलि राम-लक्ष्मणन अतुल पराक्रमद मुन्दॆ अदु निल्ललारदु.) हॆच्चिन सन्तसगॊण्डनु.॥17॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

17. samiikshya = considering; mahabaahoH = the great armed; raaghavasya = scion of Raghu’s; paraakramam = strength; lakshmaNasya cha = and Lakshmana’s; vikraantam = valour; kapiH = Hanuma; abhavat = became; priitimaan = happy.

अनुवादः

Considering the long armed Sri Rama’s strength and Lakshmana’s valour, Hanuma became happy.

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

तां रत्नवसनोपेतां गोष्ठागारावतंसिकाम् ।
यन्त्रागारस्तनीमृद्धां प्रमदामिव भूषिताम् ॥ १८ ॥
तां नष्टतिमिरां दीपैर्भास्वरैश्च महाग्रहैः ।
नगरीं राक्षसेन्द्रस्य स ददर्श महाकपिः ॥ १९ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

तां रत्नवसनोपेतां गोष्ठागारावतंसिकाम् ।
यन्त्रागारस्तनीमृद्धां प्रमदामिव भूषिताम् ॥ १८ ॥
तां नष्टतिमिरां दीपैर्भास्वरैश्च महाग्रहैः ।
नगरीं राक्षसेन्द्रस्य स ददर्श महाकपिः ॥ १९ ॥


तां रत्नवसनोपेतां कोष्ठागारावतंसकाम् ।
यन्त्रागारस्तनीमृद्धां प्रमदामिव भूषिताम् ॥ तां नष्ट तिमिरां दीपैर्भास्वरैश्च महागृहैः ।
नगरीं राक्षसेन्द्रस्य ददर्श स महाकपिः ॥

मूलम् - VR

ताम् रत्न वसन उपेताम् कोष्ठ आगार अवतंसकाम् । यन्त्र अगार स्तनीम् ऋद्धाम् प्रमदाम् इव भूषिताम् ॥ ५-३-१८ ताम् नष्ट तिमिराम् दीपैः भास्वरैः च महा गृहैः । नगरीम् राक्षस इन्द्रस्य ददर्श स महा कपिः ॥ ५-३-१९

अनुवाद (हिन्दी)

महाकपि हनुमान् ने देखा, राक्षसराज रावणकी नगरी लंका वस्त्राभूषणोंसे विभूषित सुन्दरी युवतीके समान जान पड़ती है । रत्नमय परकोटे ही इसके वस्त्र हैं, गोष्ठ (गोशाला) तथा दूसरे-दूसरे भवन आभूषण हैं । परकोटोंपर लगे हुए यन्त्रोंके जो गृह हैं, ये ही मानो इस लंकारूपी युवतीके स्तन हैं । यह सब प्रकारकी समृद्धियोंसे सम्पन्न है । प्रकाशपूर्ण द्वीपों और महान् ग्रहोंने यहाँका अन्धकार नष्ट कर दिया है ॥ १८-१९ ॥

अनुवाद (कन्नड)

आग हनुमन्तनिगॆ क्षणकाल लङ्कानगरवु सर्वालङ्कारयुक्त सुन्दरियन्तॆ कण्डितु. रत्नमयवाद कोटॆयु लङ्कासुन्दरिय वस्त्रवू, गगनचुम्बियाद सभाभवनगळे अवळ शिरोभूषण, प्राकारद मेलिद्द यन्त्रागारगळे युवतिय स्तनगळु. कडुचॆलुवॆयाद लङ्कायुवतियु दॊड्ड-दॊड्ड सौधगळ प्रकाशमानवाद दीपगळिन्द कत्तलॆयन्नु दूरमाडि देदीप्यमानळागि बॆळगुत्तिद्दळु. राक्षसेन्द्रन मडदियाद अन्तह लङ्का युवतियन्नु हनुमन्तनु नोडिदनु.॥18-19॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

18;19. saH mahaakapiH = that great monkey; dadarsha = saw; taam = that; raakshasendrasya nagariim = city of king of rakshasas; pramdaam iva = like a woman; budhhaam = with wealth; bhuushhitaam = decorated; ratnavasanopetaaam = with diamonds for her clothes; koshhThaagaaravataMsakaam = with various storage houses as earrings;antraagaarastaniim = with armouries for her breasts; nashhTa timiraam = losing darkness; mahaaR^ihaiH = by great houses; bhaasvaraishcha = radiating; diiptaiH = being illuminated by(lamps).

अनुवादः

That great monkey saw that city of king of rakshasas like a wealthy woman decorated with diamonds for her clothes, with various storage houses as earrings, with amouries for her breasts. Due to the lamps that illuminated the radiant great houses, all darkness was lost.

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

अथ सा हरिशार्दूलं प्रविशन्तं महाकपिम् ।
नगरी स्वेन रूपेण ददर्श पवनात्मजम् ॥ २० ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

अथ सा हरिशार्दूलं प्रविशन्तं महाकपिम् ।
नगरी स्वेन रूपेण ददर्श पवनात्मजम् ॥ २० ॥


अथ सा हरिशार्दूलं प्रविशन्तं महाबलम् ।
नगरी स्वेन रूपेण ददर्श पवनात्मजम् ॥

मूलम् - VR

अथ सा हरिशार्दूलम् प्रविशन्तिम् महाबलम् । नगरी स्वेन रूपेण ददर्श पवनात्मजम् ॥ ५-३-२०

अनुवाद (हिन्दी)

तदनन्तर वानरश्रेष्ठ महाकपि पवनकुमार हनुमान् उस पुरीमें प्रवेश करने लगे । इतनेमें ही उस नगरीकी अधिष्ठात्री देवी लंकाने अपने स्वाभाविक रूपमें प्रकट होकर उन्हें देखा ॥ २० ॥

अनुवाद (कन्नड)

सुन्दरवाद लङ्कानगरियु सॊबगन्नु नोडुत्ता प्रवेशिसुवुदरल्लिद्द महाबलशालियाद वानर श्रेष्ठनाद मारुतियन्नु लङ्कॆय अधिदेवतॆयु स्वस्वरूपदिन्द नोडिदळु.॥20॥

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पदच्छेदः

20. atha = thereafter; saa nagarii = (guardian of) that city; svena ruupeNa = in her own form; dadarsha = saw; hari shaarduulam = best among monkeys; mahaa balam = one with great strength; pavanaatmajam = Hanuma; pravishantam = entering.

अनुवादः

Thereafter, the guardian of that city, in her own form, saw Hanuma, the best among monkeys and the mighty one, entering.

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

सा तं हरिवरं दृष्ट्वा लङ्का रावणपालिता ।
स्वयमेवोत्थिता तत्र विकृताननदर्शना ॥ २१ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

सा तं हरिवरं दृष्ट्वा लङ्का रावणपालिता ।
स्वयमेवोत्थिता तत्र विकृताननदर्शना ॥ २१ ॥

अनुवाद (हिन्दी)

वानरश्रेष्ठ हनुमान् को देखते ही रावणपालित लंका स्वयं ही उठ खड़ी हुई । उसका मुँह देखनेमें बड़ा विकट था ॥ २१ ॥

विश्वास-प्रस्तुतिः

पुरस्तात् तस्य वीरस्य वायुसूनोरतिष्ठत ।
मुञ्चमाना महानादमब्रवीत् पवनात्मजम् ॥ २२ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

पुरस्तात् तस्य वीरस्य वायुसूनोरतिष्ठत ।
मुञ्चमाना महानादमब्रवीत् पवनात्मजम् ॥ २२ ॥


पुरस्तात् कपिवर्यस्य वायुसूनोरतिष्ठत ।
मुञ्चमाना महानादमब्रवीत् पवनात्मजम् ॥

मूलम् - VR

पुरस्तत्क पिवर्यस्य वायुसूनोरतिष्ठत । मुञ्चमाना महानादमब्रवीत्पवनात्मजम् ॥ ५-३-२२

अनुवाद (हिन्दी)

वह उन वीर पवनकुमारके सामने खड़ी हो गयी और बड़े जोरसे गर्जना करती हुई उनसे इस प्रकार बोली— ॥ २२ ॥

अनुवाद (कन्नड)

हनुमन्तनन्नु नोडुत्तले इष्ट बन्द रूपवन्नु धरिसुव लङ्काधिदेवतॆयाद लङ्किणियु विकारवाद मुखवुळ्ळ रूपवन्न धरिसि तानागिये ऎद्दु निन्तळु. बळिक वीरनाद वायुकुमारन बळिगॆ होगि ऎदुरागि निन्तु गट्टियागि गर्जिसि केळिदळु.॥21-22॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

21. dR^ishhTvaa = seeing; tam harivaram = that Hanuma; tatra = there; saa laN^kaa = that Lanka; raavaNa paalitaa = ruled by Ravana; uthitaa = rose up; svayameva = herself; vikR^ita aanana darshanaa = with a horrific appearence of face and eyes.

अनुवादः

Seeing that best among monkeys Hanuma there, that Lanka ruled by Ravana, rose up herself with a horrific appearance of face an eyes.

स्रोतः: valmikiramayan.net

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

22. atishhThata = stood; purastaat = in front; vaayusuunoH = of Hanuma; kapivarasya = the best among Vanaras; munchamaanaa = leaving; mahaaa naada = a great sound; abraviit = spoke; pavanaatmajam = to Hanuma.

अनुवादः

She stood in front of the best among Vanaras Hanuma. She made a great sound and spoke to Hanuma thus.

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

कस्त्वं केन च कार्येण इह प्राप्तो वनालय ।
कथयस्वेह यत् तत्त्वं यावत् प्राणा धरन्ति ते ॥ २३ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

कस्त्वं केन च कार्येण इह प्राप्तो वनालय ।
कथयस्वेह यत् तत्त्वं यावत् प्राणा धरन्ति ते ॥ २३ ॥

अनुवाद (हिन्दी)

‘वनचारी वानर! तू कौन है और किस कार्यसे यहाँ आया है? तुम्हारे प्राण जबतक बने हुए हैं, तबतक ही यहाँ आनेका जो यथार्थ रहस्य है, उसे ठीक-ठीक बता दो ॥ २३ ॥

अनुवाद (कन्नड)

ऎलै वनचरने! नीनु यारु? याव कार्यक्कागि इल्लिगॆ बन्दिरुवॆ? नन्न कैयिन्द नीनु सायुव मॊदलु ऎल्ल विषयगळन्नु यथावत्तागि हेळु.॥23॥

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पदच्छेदः

23. vanaalaya = O one who lives in gardens; tvam kaH = who are you; * kena kaaryeNa* = for what reason; praaptaH iha = did you come here; yaavat dharanti = as long as (you) sustained; te praaNaaH = your lives; (before that); kathayasva = tell; yat = whatever; tattvam = truth; iha = here.

अनुवादः

“O one who lives in gardens! Who are you? For what reason did you come here? As long as your lives are sustained, tell me the truth here before that.”

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

न शक्यं खल्वियं लङ्का प्रवेष्टुं वानर त्वया ।
रक्षिता रावणबलैरभिगुप्ता समन्ततः ॥ २४ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

न शक्यं खल्वियं लङ्का प्रवेष्टुं वानर त्वया ।
रक्षिता रावणबलैरभिगुप्ता समन्ततः ॥ २४ ॥

अनुवाद (हिन्दी)

‘वानर! रावणकी सेना सब ओरसे इस पुरीकी रक्षा करती है, अतः निश्चय ही तू इस लंकामें प्रवेश नहीं कर सकता’ ॥ २४ ॥

विश्वास-प्रस्तुतिः

अथ तामब्रवीद् वीरो हनुमानग्रतः स्थिताम् ।
कथयिष्यामि तत् तत्त्वं यन्मां त्वं परिपृच्छसे ॥ २५ ॥
का त्वं विरूपनयना पुरद्वारेऽवतिष्ठसे ।
किमर्थं चापि मां क्रोधान्निर्भर्त्सयसि दारुणे ॥ २६ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

अथ तामब्रवीद् वीरो हनुमानग्रतः स्थिताम् ।
कथयिष्यामि तत् तत्त्वं यन्मां त्वं परिपृच्छसे ॥ २५ ॥
का त्वं विरूपनयना पुरद्वारेऽवतिष्ठसे ।
किमर्थं चापि मां क्रोधान्निर्भर्त्सयसि दारुणे ॥ २६ ॥


अथ तामब्रवीद्वीरो हनुमानग्रतः स्थिताम् ।
कथयिष्यामि ते तत्त्वं यन्मां त्वं परिपृच्छसि ॥ का त्वं विरूपनयना पुरद्वारेवतिष्ठसि ।
किमर्थं चापि मां रुद्ध्वा निर्भर्त्सयसि दारुणा ॥

अनुवाद (हिन्दी)

तब वीरवर हनुमान् अपने सामने खड़ी हुई लंकासे बोले—‘क्रूर स्वभाववाली नारी! तू मुझसे जो कुछ पूछ रही है, उसे मैं ठीक-ठीक बता दूँगा; किंतु पहले यह तो बता, तू है कौन? तेरी आँखें बड़ी भयंकर हैं । तू इस नगरके द्वारपर खड़ी है । क्या कारण है कि तू इस प्रकार क्रोध करके मुझे डाँट रही है’ ॥ २५-२६ ॥

अनुवाद (कन्नड)

विकारवाद कण्णुगळन्नू, आकारवन्नू हॊन्दिरुव नीनारु? एतक्कागि पट्टणद बागिलल्लि निन्तिरुवॆ? भयङ्कर स्वरूपळे! याव कारणदिन्द नीनु नन्नन्नु तडॆदु भयपडिसुत्तिरुवॆ?’’ ॥26॥

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पदच्छेदः

24. vaanara = O Vanara; na shakyam khalu = it is indeed not possible; tvayaa = by you; praveshhTum = to enter; iyam laN^kaa = this Lanka; rakshitaa = protected; raavaNa balaiH = by Ravana’s forces; abhiguptaa = guarded; samantataH = all around.

अनुवादः

“O Vanara! It is indeed not possible for you to enter this city of Lanka which is protected by Ravana’s forces and strongly guarded all around.”

स्रोतः: valmikiramayan.net

अनुवाद (कन्नड)

ऎलै वानरा! रावणन सैनिकरिन्द सुत्तलू संरक्षितवाद ई लङ्कॆयन्नु प्रवेशिसुवुदु निन्निन्द साध्यविल्ल. लङ्काधिदेवतॆय आ मातन्नु केळि हनुमन्तनु यथोचितवागि उत्तरिसिदनु ‘‘ऎलै भयङ्कर स्वरूपळे! नीनु केळिरुव ऎल्ल प्रश्नॆगळिगू नानु यथावत्तागि उत्तरिसुवॆनु. आदरॆ मॊदलु नीनारॆम्बुदन्नु ननगॆ हेळु.॥24-25॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

25. atha = therafter; viiraH = the mighty; hanumaan = Hanuma; abraviit = spoke; taam = to her; sthitaam = who stood; agrataH = in front (of Him); yat = whatever; tvam = you; paripR^cchasi = are asking; maam = me; kathayishhyaami = I will tell; te = you; tattvam = that truth.

अनुवादः

Therafter the mighty Hanuma spoke to Lanka standing in front of Him as follows : “Whatever matter you are asking me, I will tell you that truthfully.”

स्रोतः: valmikiramayan.net

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

26. avatishhThasi = you are standing; puradvaare = at the entrance to city; viruupanayanaa = O one with ugly eyes; tvam kaa = who are you; daaruNaa = O horrible one; ruddhvaa = stopping; maam = me; kimartham = for what reason; nirbhatyasi = are you threatening me.

अनुवादः

“You are standing at the entrance to the city. O one with ugly eyes! Who are you? O horrible one! Stopping me, for what reason are you threatening me?”

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

हनुमद्वचनं श्रुत्वा लङ्का सा कामरूपिणी ।
उवाच वचनं क्रुद्धा परुषं पवनात्मजम् ॥ २७ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

हनुमद्वचनं श्रुत्वा लङ्का सा कामरूपिणी ।
उवाच वचनं क्रुद्धा परुषं पवनात्मजम् ॥ २७ ॥


हनूमद्वचनं श्रुत्वा लङ्का सा कामरूपिणी ।
उवाच वचनं क्रुद्धा परुषं पवनात्मजम् ॥

अनुवाद (हिन्दी)

हनुमान् जी की यह बात सुनकर इच्छानुसार रूप धारण करनेवाली लंका कुपित हो उन पवनकुमारसे कठोर वाणीमें बोली— ॥ २७ ॥

अनुवाद (कन्नड)

कामरूपिणियाद आ लङ्काधिदेवतॆयु हनुमन्तन मातन्नु केळि कोपदिन्द किडिकिडियादळु. वायुपुत्रनन्नु कुरितु अतिकठोरवाद मातुगळन्नु हेळिदळु.॥27॥

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पदच्छेदः

27. shrutvaa = listening; hanumat vachanam = to Hanuma’s words; sa laN^kaa = that Lanka; kaamaruupiNii = with ability to change form according to will; kruddhaa = became angry; uvaacha = and spoke; parushham = strong; vachanam = words; pavanaatmajam = to Hanuma.

अनुवादः

Listening to Hanuma’s words, that Lanka, with ability to achieve desired form, became angry and spoke these strong words to Hanuma.

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

अहं राक्षसराजस्य रावणस्य महात्मनः ।
आज्ञाप्रतीक्षा दुर्धर्षा रक्षामि नगरीमिमाम् ॥ २८ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

अहं राक्षसराजस्य रावणस्य महात्मनः ।
आज्ञाप्रतीक्षा दुर्धर्षा रक्षामि नगरीमिमाम् ॥ २८ ॥

अनुवाद (हिन्दी)

‘मैं महामना राक्षसराज रावणकी आज्ञाकी प्रतीक्षा करनेवाली उनकी सेविका हूँ । मुझपर आक्रमण करना किसीके लिये भी अत्यन्त कठिन है । मैं इस नगरीकी रक्षा करती हूँ ॥ २८ ॥

अनुवाद (कन्नड)

इतररिन्द ऎदुरिसलु असाध्यळाद नानु - राक्षसर राजनाद महात्मनाद रावणन आज्ञाधारकळागि ई नगरवन्नु रक्षिसुत्तिरुवॆनु.॥28॥

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पदच्छेदः

28. aham = I; rakshaami = protect; imaam = this; nagariim = city; durdharshhaa = being invincible; aaJNaa pratiikshaa = waiting for orders; raakshasa raajasya = of the king of rakshasas; raavaNasya = of Ravana; mahaatmanaH = the great souled one.

अनुवादः

“I protect this city, being invincible. I wait for the orders of the king of demons Ravana, the great one.”

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

न शक्यं मामवज्ञाय प्रवेष्टुं नगरीमिमाम् ।
अद्य प्राणैः परित्यक्तः स्वप्स्यसे निहतो मया ॥ २९ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

न शक्यं मामवज्ञाय प्रवेष्टुं नगरीमिमाम् ।
अद्य प्राणैः परित्यक्तः स्वप्स्यसे निहतो मया ॥ २९ ॥


न शक्या मामवज्ञाय प्रवेष्टुं नगरी त्वया ।
अद्य प्राणैः परित्यक्तः स्वप्स्यसे निहतो मया ॥

अनुवाद (हिन्दी)

‘मेरी अवहेलना करके इस पुरीमें प्रवेश करना किसीके लिये भी सम्भव नहीं है । आज मेरे हाथसे मारा जाकर तू प्राणहीन हो इस पृथ्वीपर शयन करेगा ॥ २९ ॥

अनुवाद (कन्नड)

नन्नन्नु अनादरणॆ माडि ई नगरवन्नु प्रवेशिसलु निन्निन्दागदु. ईग निनगॆ नन्न कैयिन्द सावु तप्पदु. नीनु असुनीगि दीर्घ निद्रॆयल्लि मलगुवॆ. ॥29॥

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पदच्छेदः

29. avajNaaya = humiliating; maam = me; na shakyaa = it is not possible; tvayaa = by you; praveshhTum = to enter; nagarii = the city; adya = now; nihataH = being beaten; mayaa = by me; parityaktaH = leaving; praaNaiH = life; svapsase = you will sleep (forever).

अनुवादः

“After humilliating me it is not possible for you to enter the city. Being beaten by me, you will leave life and have a permanent sleep.”

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

अहं हि नगरी लङ्का स्वयमेव प्लवङ्गम ।
सर्वतः परिरक्षामि अतस्ते कथितं मया ॥ ३० ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

अहं हि नगरी लङ्का स्वयमेव प्लवङ्गम ।
सर्वतः परिरक्षामि अतस्ते कथितं मया ॥ ३० ॥


अहं हि नगरी लङ्का स्वयमेव प्लवङ्गम ।
सर्वतः परिरक्षामि ह्येतत्ते कथितं मया ॥

अनुवाद (हिन्दी)

‘वानर! मैं स्वयं ही लंका नगरी हूँ, अतः सब ओरसे इसकी रक्षा करती हूँ । यही कारण है कि मैंने तेरे प्रति कठोर वाणीका प्रयोग किया है’ ॥ ३० ॥

अनुवाद (कन्नड)

ऎलै कपीश्वरा! नाने ई लङ्कॆगॆ अधिदेवतॆयागिरुवॆनु. ऎल्ल विधदिन्द नाने साक्षात्तागि ई नगरवन्नु रक्षिसुत्तिरुवॆनु. ई कारणदिन्द नानु निनगॆ नगरवन्नु प्रवेशिसबारदु ऎन्दु हेळुत्तिद्देनॆ.’’ ॥30॥

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पदच्छेदः

30. plavangama = O Vanara! aham = I; parirakshaami = am protecting; * laNkaa nagarii* = the city of Lanka; sarvataH = in all directions; etat = this matter; kathitam = has been indeed told; te = to you; mayaa = by me.

अनुवादः

“O Vanara! I am protecting this city of Lanka in all directions. This matter has been already told to you by me.”

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

लङ्काया वचनं श्रुत्वा हनुमान् मारुतात्मजः ।
यत्नवान् स हरिश्रेष्ठः स्थितः शैल इवापरः ॥ ३१ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

लङ्काया वचनं श्रुत्वा हनुमान् मारुतात्मजः ।
यत्नवान् स हरिश्रेष्ठः स्थितः शैल इवापरः ॥ ३१ ॥


लङ्काया वचनं श्रुत्वा हनूमान् मारुतात्मजः ।
यत्नवान् स हरिश्रेष्ठः स्थितः शैल इवापरः ॥

मूलम् - VR

लङ्काया वचनम् श्रुत्वा हनुमान् मारुतात्मजः । यत्नवान्स हरिश्रेष्ठः स्थितश्शैल इवापरः ॥ ५-३-३१

अनुवाद (हिन्दी)

लंकाकी यह बात सुनकर पवनकुमार कपिश्रेष्ठ हनुमान् उसे जीतनेके लिये यत्नशील हो दूसरे पर्वतके समान वहाँ खड़े हो गये ॥ ३१ ॥

अनुवाद (कन्नड)

लङ्काधिदेवतॆय आ मातन्नु केळि वायुपुत्रनू, हरिश्रेष्ठनू, प्रयत्नशीलनू आद हनुमन्तनु अवळ मुन्दॆ मत्तॊन्दु पर्वतदन्तॆये अचलवागि निन्तनु.॥31॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

31. maarutaatmajaH = Son of Vayu - Hanuma; hari shreshhThaH = the best among Vanaras; shrutvaa = hearing; laNkayaaH vachanam = Lanka’s words; sthitaH = stood up; aparaH shailaH iva = like a second mountain; yatnavaan = with a purpose.

अनुवादः

The son of Vayu and best among Vanaras heard Lanka’s words and stood up like a second mountain, with a purpose.

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

स तां स्त्रीरूपविकृतां दृष्ट्वा वानरपुङ्गवः ।
आबभाषेऽथ मेधावी सत्त्ववान् प्लवगर्षभः ॥ ३२ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

स तां स्त्रीरूपविकृतां दृष्ट्वा वानरपुङ्गवः ।
आबभाषेऽथ मेधावी सत्त्ववान् प्लवगर्षभः ॥ ३२ ॥


स तां सीरूपविकृतां दृष्ट्वा वानरपुङ्गवः ।
आबभाषेथ मेधावी सत्त्ववान् प्लवगर्षभः ॥

मूलम् - VR

स ताम् स्त्रीरूपविकृताम् दृष्ट्वा वानरपुङ्गवः । आबभाषेऽथ मेधावि सत्त्वान् प्लवगर्षभः ॥ ५-३-३२

अनुवाद (हिन्दी)

लंकाको विकराल राक्षसीके रूपमें देखकर बुद्धिमान् वानरशिरोमणि शक्तिशाली कपिश्रेष्ठ हनुमान् ने उससे इस प्रकार कहा— ॥ ३२ ॥

अनुवाद (कन्नड)

बळिक वानरोत्तमनू, हॆच्चिन प्रज्ञाशालियू, महाबल सम्पन्ननाद हनुमन्तनु विकारवाद स्त्रीरूपवन्नु धरिसिद लङ्काधिदेवतॆयन्नु नोडि अवळल्लि हीगॆ माताडिदनु.॥32॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

32. atha = thereafter; saH = that Hanuma; methaavii = the wise one; sattvaan = with strength; plavagarshhabhaH = best among those who can fly; vaanara puNgavaH = best among Vanaras; dR^ishhTvaa = saw; aam = that Lanka; strii ruupa ikR^itaam = in the form of a lady and ugly; aababhaashhe = spoke thus.

अनुवादः

Thereafter that Hanuma the wise one, with great strength, best among those who can fly and best among Vanaras, saw that city of Lanka in the form of an ugly woman and spoke thus.

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

द्रक्ष्यामि नगरीं लङ्कां साट्टप्राकारतोरणाम् ।
इत्यर्थमिह सम्प्राप्तः परं कौतूहलं हि मे ॥ ३३ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

द्रक्ष्यामि नगरीं लङ्कां साट्टप्राकारतोरणाम् ।
इत्यर्थमिह सम्प्राप्तः परं कौतूहलं हि मे ॥ ३३ ॥

अनुवाद (हिन्दी)

‘मैं अट्टालिकाओं, परकोटों और नगरद्वारोंसहित इस लंका नगरीको देखूँगा । इसी प्रयोजनसे यहाँ आया हूँ । इसे देखनेके लिये मेरे मनमें बड़ा कौतूहल है ॥

अनुवाद (कन्नड)

‘‘लङ्काधिदेवतॆये! उप्परिगॆगळिन्दलू, कोटॆ-कॊत्तलुगळिन्दलू, तोरणगळिन्दलू, ऒप्पुव मनोहरवाद लङ्कानगरवन्नु नोडुव सलुवागि नानिल्लिगॆ बन्दिरुवॆनु. इदन्नु नोडुव कूतूहल ननगॆ हॆच्चागिदॆ. ॥33 ॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

33. drakshyaami = I should like to see; laN^kaam nagariim = the city of lanka; saaTTaa praakaara toraNaam = with its palaces; defensive walls and archways; iti artham = for this reason; saMpraaptaH = (I) came; iha = here; param kautuuhalam = (there is) lot of curiosity; me = to me.

अनुवादः

“I should like to see the city of Lanka with its palaces, defensive walls and archways. I came here for that reason. I am very curious to see them.”

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

वनान्युपवनानीह लङ्कायाः काननानि च ।
सर्वतो गृहमुख्यानि द्रष्टुमागमनं हि मे ॥ ३४ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

वनान्युपवनानीह लङ्कायाः काननानि च ।
सर्वतो गृहमुख्यानि द्रष्टुमागमनं हि मे ॥ ३४ ॥

अनुवाद (हिन्दी)

‘इस लंकाके जो वन, उपवन, कानन और मुख्य-मुख्य भवन हैं, उन्हें देखनेके लिये ही यहाँ मेरा आगमन हुआ है’ ॥ ३४ ॥

अनुवाद (कन्नड)

इल्लिय वनगळन्नु, उपवनगळन्नु, अरण्यगळन्नु ऎल्ल कडॆगळल्लियू इरुव श्रेष्ठवाद सौधगळन्नु नोडुवुदे नन्न आगमनद उद्देशवागिदॆ.’’ ॥34 ॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

34. me aagamanm = my arrival; iha = here; drashhTum hi = to indeed see; laN^kaayaaH = Lanka’s; vanaani = gardens; upavanaani = parks; kaananaani cha = and forests; gR^iha mukhyaani = important houses; sarvataH = all over

अनुवादः

“My arrival here is indeed to see Lanka’s gardens, parks, forests and important houses all over.”

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

तस्य तद् वचनं श्रुत्वा लङ्का सा कामरूपिणी ।
भूय एव पुनर्वाक्यं बभाषे परुषाक्षरम् ॥ ३५ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

तस्य तद् वचनं श्रुत्वा लङ्का सा कामरूपिणी ।
भूय एव पुनर्वाक्यं बभाषे परुषाक्षरम् ॥ ३५ ॥

अनुवाद (हिन्दी)

हनुमान् जी का यह कथन सुनकर इच्छानुसार रूप धारण करनेवाली लंका पुनः कठोर वाणीमें बोली— ॥

विश्वास-प्रस्तुतिः

मामनिर्जित्य दुर्बुद्धे राक्षसेश्वरपालिताम् ।
न शक्यं ह्यद्य ते द्रष्टुं पुरीयं वानराधम ॥ ३६ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

मामनिर्जित्य दुर्बुद्धे राक्षसेश्वरपालिताम् ।
न शक्यं ह्यद्य ते द्रष्टुं पुरीयं वानराधम ॥ ३६ ॥


मामनिर्जित्य दुर्बुद्धे राक्षसेश्वरपालिताम् ।
न शक्यमद्य ते द्रष्टुं पुरीयं वानराधम ॥

मूलम् - VR

मामनिर्जत्य दुर्बद्धे राक्षसेश्वरपालिता । न शक्यमद्य ते द्रष्टुम् पुरीयम् वनराधम ॥ ५-३-३६

अनुवाद (हिन्दी)

‘खोटी बुद्धिवाले नीच वानर! राक्षसेश्वर रावणके द्वारा मेरी रक्षा हो रही है । तू मुझे परास्त किये बिना आज इस पुरीको नहीं देख सकता’ ॥ ३६ ॥

अनुवाद (कन्नड)

हनुमन्तन ई मातुगळन्नु केळि, कामरूपिणियाद लङ्किणियु अति कठोरवाद अक्षरगळिन्द कूडिरुव वाक्यवन्नु हेळिदळु ‘‘दुष्टबुद्धिय वानराधमने! नन्नन्नु जयिसदॆ राक्षसेश्वर रावणनिन्द परिपालिसल्पडुत्तिरुव ई लङ्कॆयन्नु नीनु नोडलारॆ’’ ॥35-36॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

35. shrutvaa = listening; tasya = to His; tat vachanam = those words; laN^kaa kaama ruupiNii = Lanka with the ability to change form according to will; babhaashhe = spoke; punaH = again; parushhaaksharam = strong words; bhuuyaH eve = stronger than before.

अनुवादः

Listening to Hanuma’s words, Lanka with the ability to assume desired form, spoke harsh words stronger than before.

स्रोतः: valmikiramayan.net

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

36. vaanaraadhama = O lowly Vanara! durbuddhe = with evil mind; na shakyam = it is not possible; te = to you; drashhTum = to see; adya = now; iyam purii = this city; raakshaseswara paalitaa = ruled by king of rakshasas; anirjitya maam = without defeating me.

अनुवादः

“O lowly Vanara with an evil mind! It is not possile for you to see this city ruled by king of rakshasas, without first defeating me.”

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

ततः स हरिशार्दूलस्तामुवाच निशाचरीम् ।
दृष्ट्वा पुरीमिमां भद्रे पुनर्यास्ये यथागतम् ॥ ३७ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

ततः स हरिशार्दूलस्तामुवाच निशाचरीम् ।
दृष्ट्वा पुरीमिमां भद्रे पुनर्यास्ये यथागतम् ॥ ३७ ॥

मूलम् - VR

ततः स कपिशार्दूलस्तामुवाच निशाचरीम् । दृष्वा पुरीमिमाम् भद्रे पुनर्यास्ये यथागतम् ॥ ५-३-३७

अनुवाद (हिन्दी)

तब उन वानरशिरोमणिने उस निशाचरीसे कहा—‘भद्रे! इस पुरीको देखकर मैं फिर जैसे आया हूँ, उसी तरह लौट जाऊँगा’ ॥ ३७ ॥

अनुवाद (कन्नड)

अदक्कॆ हनुमन्तनु राक्षसिगॆ पुनः हेळिदनु ‘‘ऎलै शुभाङ्गिये! ई पट्टणवन्नु ऒम्मॆ नोडि, नानु ऎल्लिन्द बन्दिरुवनो अल्लिगॆ मरळि होगुत्तेनॆ’’ ऎन्दु विनम्रनागि नुडिदनु. ॥37॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

37. tataH = then; saH kapi shaarduulaH = that tiger among Vanaras Hanuma; uvaacha = spoke; taam nishaachariim = to that demon; bhadre = O auspicious one! dR^ishhTvaa = after seeing; imaam puriim = this city; yaasye = I will return; punaH = agin; * yataagatam* = as I came.

अनुवादः

Then that tiger among Vanaras Hanuma spoke to that demon : “O auspicious one! After seeing this city I will return back again to where I came from.”

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

ततः कृत्वा महानादं सा वै लङ्का भयङ्करम् ।
तलेन वानरश्रेष्ठं ताडयामास वेगिता ॥ ३८ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

ततः कृत्वा महानादं सा वै लङ्का भयङ्करम् ।
तलेन वानरश्रेष्ठं ताडयामास वेगिता ॥ ३८ ॥


ततः कृत्वा महानादं सा वै लङ्का भयावहम् ।
तलेन वानरश्रेष्ठं ताडयामास वेगिता ॥

अनुवाद (हिन्दी)

यह सुनकर लंकाने बड़ी भयंकर गर्जना करके वानरश्रेष्ठ हनुमान् को बड़े जोरसे एक थप्पड़ मारा ॥ ३८ ॥

अनुवाद (कन्नड)

हनुमन्तनु हीगॆ हेळलु लङ्काधिदेवतॆयु परमक्रुद्धळागि भयङ्करवागि गर्जनॆयन्नु माडुत्ता अङ्गैनिन्द वानरश्रेष्ठनन्नु वेगवागि प्रहरिसिदळु. ॥38॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

38. tataH = thereafter; saa lankaa = that Lanka; kR^itvaa = made; mahaanaadam = a great sound; bhayaavaham = causing terror; taaDayaamaasa = hit; * vaanarashreshhTham* = the best among Vanaras; talena = with the palm; vegitaa = quickly.

अनुवादः

Thereafter that Lanka made a great sound causing terror and hit Hanuma, the best among Vanaras, with her palm quickly.

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

ततः स हरिशार्दूलो लङ्कया ताडितो भृशम् ।
ननाद सुमहानादं वीर्यवान् मारुतात्मजः ॥ ३९ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

ततः स हरिशार्दूलो लङ्कया ताडितो भृशम् ।
ननाद सुमहानादं वीर्यवान् मारुतात्मजः ॥ ३९ ॥


ततः स कपिशार्दूलो लङ्कया ताडितो भृशम् ।
ननाद सुमहानादं वीर्यवान् पवनात्मजः ॥

मूलम् - VR

ततः स कपिशार्दुलो लङ्काया ताडितो भृशम् । ननाद सुमहानादम् वीर्यवान् पवनात्मजः ॥ ५-३-३९

अनुवाद (हिन्दी)

लंकाद्वारा इस प्रकार जोरसे पीटे जानेपर उन परम पराक्रमी पवनकुमार कपिश्रेष्ठ हनुमान् ने बड़े जोरसे सिंहनाद किया ॥ ३९ ॥

अनुवाद (कन्नड)

राक्षसियिन्द बलवागि प्रहरिसल्पट्ट वीर्यवन्तनाद, वायुपुत्रनाद हरिश्रेष्ठ हनुमन्तनु अत्यन्त बिरुसागि गर्जिसिदनु.॥39॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

39. tataH = then; saH kapishaarduulaH = that tiger among Vanaras; viiryavaan = the poweful; pavanaatmajaH = son of Vayu; taaDitaH = being hit; lankayaa = by Lanka; bhR^isham = a lot; nanaada = made; sumahaanaadam = a great sound.

अनुवादः

Then that tiger among Vanaras, the powerful son of Vayu, being hit powerfully by Lanka made a great sound.

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

ततः संवर्तयामास वामहस्तस्य सोऽङ्गुलीः ।
मुष्टिनाभिजघानैनां हनुमान् क्रोधर्मूच्छितः ॥ ४० ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

ततः संवर्तयामास वामहस्तस्य सोऽङ्गुलीः ।
मुष्टिनाभिजघानैनां हनुमान् क्रोधर्मूच्छितः ॥ ४० ॥


ततः संवर्तयामास वामहस्तस्य सोङ्गुलीः ।
मुष्टिनाभिजघानैनां हनूमान् क्रोधमूर्छितः ॥

मूलम् - VR

ततः सम्वर्तयामास वामहस्तस्य सोऽङ्गुळीः । मुष्टिनाभिजघूनैनाम् हनुमान् क्रोधमूर्चितः ॥ ५-३-४० स्त्री चेति मन्यमानेन नातिक्रोधः स्वयम् कृतः ।

अनुवाद (हिन्दी)

फिर उन्होंने अपने बायें हाथकी अंगुलियोंको मोड़कर मुट्ठी बाँध ली और अत्यन्त कुपित हो उस लंकाको एक मुक्का जमा दिया ॥ ४० ॥

अनुवाद (कन्नड)

क्रोधदिन्द मैमरॆत्तिद्दरू हनुमन्तनु ऎडगैय मुष्टिबिगिदुकॊण्डु राक्षसियन्नु मॆल्लगॆ मुष्टियिन्द हॊडॆदनु.॥40॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

tataH = thereafter; saH hanumaan = that Hanuma; krodhamuurchitaH = became dizzy with anger; saMvartayaamaasa = folded; aN^guLiiH = fingers; vaamahastasya = of left hand; abhihaghaana = hit; enaam = her; mushhTinaa = with His fist; strii cha iti = she is a woman (thus); manyamaanena = thinking; ati krodhaH = great anger; svayam na kR^itaH = was not done by Himself.

अनुवादः

Thereafter that Hanuma became dizzy with anger and folded his fingers of left hand. He then hit her with His fist. “She is a woman” - thinking thus He did not show much anger by Himself.

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

स्त्री चेति मन्यमानेन नातिक्रोधः स्वयं कृतः ।
सा तु तेन प्रहारेण विह्वलाङ्गी निशाचरी ।
पपात सहसा भूमौ विकृताननदर्शना ॥ ४१ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

स्त्री चेति मन्यमानेन नातिक्रोधः स्वयं कृतः ।
सा तु तेन प्रहारेण विह्वलाङ्गी निशाचरी ।
पपात सहसा भूमौ विकृताननदर्शना ॥ ४१ ॥

मूलम् - VR

सा तु तेन प्रहारेण विह्वलाङ्गी नीशाचरी ॥ ५-३-४१ पपात सहसा भूमौ विकृताननदर्शना ।

अनुवाद (हिन्दी)

उसे स्त्री समझकर हनुमान् जी ने स्वयं ही अधिक क्रोध नहीं किया । किंतु उस लघु प्रहारसे ही उस निशाचरीके सारे अंग व्याकुल हो गये । वह सहसा पृथ्वीपर गिर पड़ी । उस समय उसका मुख बड़ा विकराल दिखायी देता था ॥ ४१ ॥

विश्वास-प्रस्तुतिः

ततस्तु हनुमान् वीरस्तां दृष्ट्वा विनिपातिताम् ।
कृपां चकार तेजस्वी मन्यमानः स्त्रियं च ताम् ॥ ४२ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

ततस्तु हनुमान् वीरस्तां दृष्ट्वा विनिपातिताम् ।
कृपां चकार तेजस्वी मन्यमानः स्त्रियं च ताम् ॥ ४२ ॥


ततस्तु हनुमान् प्राज्ञस्तां दृष्ट्वा विनिपातिताम् । कृपां चकार तेजस्वी मन्यमानः स्त्रियं तु ताम् ।

मूलम् - VR

ततस्तु हनुमान् प्राज्ञस्ताम् दृष्ट्वा विनिपातिताम् ॥ ५-३-४२ कृपाम् चकार तेजस्वी मन्यमानः स्त्रियम् तु ताम् ।

अनुवाद (हिन्दी)

अपने ही द्वारा गिरायी गयी उस लंकाकी ओर देखकर और उसे स्त्री समझकर तेजस्वी वीर हनुमान् को उसपर दया आ गयी । उन्होंने उसपर बड़ी कृपा की ॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

tataH = thereafter; praJNaH = the intellectual; tesjasvii = the glorious one; hanumaan = Hanuma; dR^ishhTvaa = saw; taam = her; vinipaatitaam = fallen down; manya maaaanaH = thinking; taam = her; striyam = to be woman; chakaara = made; kR^ipaam = kindness.

अनुवादः

Thereafter the intellectual and glorious Hanuma saw her fallen down and thinking her to be woman, showed kindness.

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

ततो वै भृशमुद्विग्ना लङ्का सा गद‍्गदाक्षरम् ।
उवाचागर्वितं वाक्यं हनुमन्तं प्लवङ्गमम् ॥ ४३ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

ततो वै भृशमुद्विग्ना लङ्का सा गद‍्गदाक्षरम् ।
उवाचागर्वितं वाक्यं हनुमन्तं प्लवङ्गमम् ॥ ४३ ॥


ततो वै भृशसंविग्ना लङ्का सा गद्गदाक्षरम् । उवाचागर्वितं वाक्यं हनूमन्तं प्लवङ्गमम् ।

मूलम् - VR

ततो वै भृशसम्विग्ना लङ्का गद्गदाक्षरम् ॥ ५-३-४३ उवाचागर्वितम् वाक्यम् हनूमन्तम् प्लवङ्गमम् ।

अनुवाद (हिन्दी)

उधर अत्यन्त उद्विग्न हुई लंका उन वानरवीर हनुमान् से अभिमानशून्य गद‍्गदवाणीमें इस प्रकार बोली— ॥ ४३ ॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

tataH = thereafter; saa lan^kaa = that Lanka; bhR^isha saMvignaa = being very gloomy; uvaacha = spoke; gadgadaaksharam = with faltering tone; vaakyam = these words; agarvitam = without being proud; hanuumantam = to Hanuma; plavaN^gam = the Vanara.

अनुवादः

Thereafter that Lanka being very gloomy spoke with a falterting tone without pride these words to Hanuma the Vanara.

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

प्रसीद सुमहाबाहो त्रायस्व हरिसत्तम ।
समये सौम्य तिष्ठन्ति सत्त्ववन्तो महाबलाः ॥ ४४ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

प्रसीद सुमहाबाहो त्रायस्व हरिसत्तम ।
समये सौम्य तिष्ठन्ति सत्त्ववन्तो महाबलाः ॥ ४४ ॥

मूलम् - VR

प्रसीद सुमहाबाहो त्रायस्व हरिसत्तम ॥ ५-३-४४ समये सौम्य तिष्ठन्ति स्त्त्ववन्तो महाबलाः ।

अनुवाद (हिन्दी)

‘महाबाहो! प्रसन्न होइये । कपिश्रेष्ठ! मेरी रक्षा कीजिये । सौम्य! महाबली सत्त्वगुणशाली वीर पुरुष शास्त्रकी मर्यादापर स्थिर रहते हैं (शास्त्रमें स्त्रीको अवध्य बताया है, इसलिये आप मेरे प्राण न लीजिये) ॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

su mahaabaaho = O long armed one!; hari sattama = O best among Vanaras!; prasiida = get propitiated; traayasva = protect me; saumya = O gentle one!; mahaabalaaH = those with great strength; sattvavantaH = with courage; tishhThanti = stand; samaye = on tradition.

अनुवादः

“O long armed one! O best among Vanaras! Get propitiated and protect me. O gentle one! Those with great strength and courage always stand firm on tradition.”

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

अहं तु नगरी लङ्का स्वयमेव प्लवङ्गम ।
निर्जिताहं त्वया वीर विक्रमेण महाबल ॥ ४५ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

अहं तु नगरी लङ्का स्वयमेव प्लवङ्गम ।
निर्जिताहं त्वया वीर विक्रमेण महाबल ॥ ४५ ॥

अनुवाद (हिन्दी)

‘महाबली वीर वानर! मैं स्वयं लंकापुरी ही हूँ, आपने अपने पराक्रमसे मुझे परास्त कर दिया है ॥ ४५ ॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

plavangama = O Vanara! aham tu = I am; lankaanagaryeva = city of Lanka itself; svayameva = myself; mahaa bala = O strong one! viia = O courageous one! aham = I; nirjitaa = have been defeated; tvayaa vikrameNa = by your strength.

अनुवादः

“O Vanara! I am myself the city of Lanka. O strong one! O courageous one! I am defeated by your strength.”

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

इदं च तथ्यं शृणु मे ब्रुवन्त्या वै हरीश्वर ।
स्वयं स्वयम्भुवा दत्तं वरदानं यथा मम ॥ ४६ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

इदं च तथ्यं शृणु मे ब्रुवन्त्या वै हरीश्वर ।
स्वयं स्वयम्भुवा दत्तं वरदानं यथा मम ॥ ४६ ॥


इदं च तथ्यं शृणु वै ब्रुवन्त्या मे हरीश्वर । स्वयम्भुवा पुरा दत्तं वरदानं यथा मम ।

मूलम् - VR

इदम् तु तथ्यम् शृणु वै ब्रुवन्त्य मे हरीश्वर ॥ ५-३-४६ स्वयम्भुवा पुरा दत्तम् वरदानम् यथा मम ।

अनुवाद (हिन्दी)

‘वानरेश्वर! मैं आपसे एक सच्ची बात कहती हूँ । आप इसे सुनिये । साक्षात् स्वयम्भू ब्रह्माजीने मुझे जैसा वरदान दिया था, वह बता रही हूँ ॥ ४६ ॥

अनुवाद (कन्नड)

लङ्काधिदेवतॆयन्नु स्त्रीयॆन्दु भाविसि हनुमन्तनु अवळ मेलॆ हॆच्चु कोपगॊळ्ळलिल्ल. साधारणवाद रीतियल्लि अदू ऎडगैय मुष्टियिन्द हॊडॆदिद्दनु. आ अल्प प्रहारदिन्दले अवळ शरीरवु जर्जरितवायितु. विकारवाद मुखदिन्द भूमिय मेलॆ बिद्दळु. बळिक तेजस्वियाद, प्राज्ञनाद हनुमन्तनु लङ्कादेवतॆयु बिद्दुदन्नु नोडि स्त्रीयॆन्दु भाविसि अवळ मेलॆ कृपॆदोरिदनु. पॆट्टुतिन्दु उद्विग्नळागिद्द राक्षसियु हनुमन्तनिगॆ गर्व रहितळागि गद्गदध्वनियिन्द हीगॆ हेळिदळु ओ महा पुरुषा! प्रसन्ननागु. हरिश्रेष्ठने! सौम्यने! नन्नन्नु कापाडु. महाबलराद धैर्यवन्तराद पुरुषरु ऎन्दिगू शास्त्र मार्यादॆयन्नु मीरि नडॆदुकॊळ्ळुवुदिल्ल. धर्ममार्गदल्लिये स्थिरवागिरुत्तारॆ. शास्त्रगळल्लि स्त्रीयु अवध्यळॆन्दु हेळिदॆ. आदुदरिन्द नीनु नन्न प्राणहरण माडबेड. ओ वानरोत्तमा! नानु मूर्तस्वरूपळाद लङ्काधिदेवतॆयु. महाबलशालियाद ओ वीरने! पराक्रमदिन्द नीनिन्दु नन्नन्नु जयिसिरुवॆ. नानु हेळलिरुव सत्यवाक्यवन्नु केळु.॥41-46॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

harrishvaraa = O lord of Vanaras! puraa = in earlier times; yathaa = how; varadaanam = a gift of boon; dattam = had been given; mama = to me; svayambhuvaa = by Brahma; shR^iNu vai = hear; me = by me; bruvanyaaH = being spoken; idam tathyam tu = this truth.

अनुवादः

“O lord of Vanaras! In earlier times I had been given a boon by Lord Brahma. Hear from me about this matter.”

स्रोतः: valmikiramayan.net

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

saa nishaacharii tu = that demon; papaata = fell; bhuumau = on land; sahasaa = immediately;tena prahaareNa = by that hit; vihvlaaN^gii = with a distressed body; vikR^itaanana darshanaa = and became with a horrific face in appearance.

अनुवादः

That demon fell on land immediately by that hit with a distressed body and appeared with a horrific face.

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

यदा त्वां वानरः कश्चिद् विक्रमाद् वशमानयेत् ।
तदा त्वया हि विज्ञेयं रक्षसां भयमागतम् ॥ ४७ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

यदा त्वां वानरः कश्चिद् विक्रमाद् वशमानयेत् ।
तदा त्वया हि विज्ञेयं रक्षसां भयमागतम् ॥ ४७ ॥

मूलम् - VR

यदा त्वाम् वानरः कश्चिद्विक्रमाद्वशमानयेत् ॥ ५-३-४७ तदा त्वया हि विज्ञेयम् रक्षसाम् भयामागतम् ।

अनुवाद (हिन्दी)

‘उन्होंने कहा था—‘जब कोई वानर तुझे अपने पराक्रमसे वशमें कर ले, तब तुझे यह समझ लेना चाहिये कि अब राक्षसोंपर बड़ा भारी भय आ पहुँचा है ॥ ४७ ॥

विश्वास-प्रस्तुतिः

स हि मे समयः सौम्य प्राप्तोऽद्य तव दर्शनात् ।
स्वयम्भूविहितः सत्यो न तस्यास्ति व्यतिक्रमः ॥ ४८ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

स हि मे समयः सौम्य प्राप्तोऽद्य तव दर्शनात् ।
स्वयम्भूविहितः सत्यो न तस्यास्ति व्यतिक्रमः ॥ ४८ ॥


स्वयम्भुविहितः सत्यो न तस्यास्ति व्यतिक्रमः ।

मूलम् - VR

स हि म् समयः सौम्य प्राप्तोऽय तव द्र्शनात् ॥ ५-३-४८ स्वयम्भूविहितः सत्यो न तस्यास्ति व्यतिक्रमः ।

अनुवाद (हिन्दी)

‘सौम्य! आपका दर्शन पाकर आज मेरे सामने वही घड़ी आ गयी है । ब्रह्माजीने जिस सत्यका निश्चय कर दिया है, उसमें कोई उलट-फेर नहीं हो सकता ॥ ४८ ॥

अनुवाद (कन्नड)

‘‘हिन्दॆ ननगॆ ब्रह्मदेवरु ऒन्दु वरवन्नु अनुग्रहिसिद्दरु वानरनॊब्बनु निन्न बळिगॆ बन्दु पराक्रमदिन्द निन्नन्नु जयिसिदाग राक्षसरिगॆ भयवु ऒदगिबन्दितॆन्दु तिळियबेकु,’’ ब्रह्मदेवर वरदन्तॆ इन्दु निन्न दर्शनदिन्द आ समयवु ऒदगितॆन्दु तिळियुत्तेनॆ. ॥47-48॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

saumya = O gentle one! tava darshanaat = with your apparance; adya = now; saH samayaH praaptaH = that time has arrived; me = for me; svayambhuuvihitaH = the ordinance of Brahma; satyaH = is true; naasti = there is no; vyatikramaH = change; tasya = to that.

अनुवादः

“O gentle one! With your appearance now, that time has come for me. Ordinance of Brahma is the truth and is immutable.”

स्रोतः: valmikiramayan.net

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

yadaa = whenever; kashchit vaanaraH = one Vanara; vikramaat = by his prowess; tvaam vasham aanayet = conquers you; tadaa = then; bhayam = fear; aagatam = will come; rakshasaam = for Rakshasas; tvayaa vigneyam = let it be known by you.

अनुवादः

“Let this be known by you - whenever a Vanara conquers you with his might, then a fear will come for Rakshasas.”

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

सीतानिमित्तं राज्ञस्तु रावणस्य दुरात्मनः ।
रक्षसां चैव सर्वेषां विनाशः समुपागतः ॥ ४९ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

सीतानिमित्तं राज्ञस्तु रावणस्य दुरात्मनः ।
रक्षसां चैव सर्वेषां विनाशः समुपागतः ॥ ४९ ॥


रक्षसां चैव सर्वेषां विनाशः समुपस्थितः ।

मूलम् - VR

सीतानिमित्तंम् राज्ञस्तु रावणस्य दुरात्मनः ॥ ५-३-४९ विधत्स्व सर्वकार्याणि यानि यानिह वाञ्चसि ।

अनुवाद (हिन्दी)

‘अब सीताके कारण दुरात्मा राजा रावण तथा समस्त राक्षसोंके विनाशका समय आ पहुँचा है ॥ ४९ ॥

विश्वास-प्रस्तुतिः

तत् प्रविश्य हरिश्रेष्ठ पुरीं रावणपालिताम् ।
विधत्स्व सर्वकार्याणि यानि यानीह वाञ्छसि ॥ ५० ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

तत् प्रविश्य हरिश्रेष्ठ पुरीं रावणपालिताम् ।
विधत्स्व सर्वकार्याणि यानि यानीह वाञ्छसि ॥ ५० ॥

मूलम् - VR

तत्प्रविश्य हरिश्रेष्ठम् पुरीम् रावणपालिताम् ॥ ५-३-५० विधत्स्व सर्वकार्याण् यानि यानीह वाञ्चसि ।

अनुवाद (हिन्दी)

‘कपिश्रेष्ठ! अतः आप इस रावणपालित पुरीमें प्रवेश कीजिये और यहाँ जो-जो कार्य करना चाहते हों, उन सबको पूर्ण कर लीजिये ॥ ५० ॥

अनुवाद (कन्नड)

ब्रह्मदेवरु हेळिद मातु सत्यवागि परिणमिसिदॆ. अवरु हेळिद मातु बदलागदु. सीतानिमित्तवागि दुरात्मनाद रावणनिगू ऎल्ल राक्षसरिगू विनाशवु सन्निहितवागिदॆ. हरिश्रेष्ठने! नीनीग रावणनिन्द परिपालिसल्पडुत्तिरुव ई लङ्कापट्टणवन्नु प्रवेशिसि, नीनु अपेक्षिसिद ऎल्ल कार्यवन्नु निर्वहिसु. ॥49-50॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

hari shreshhTha = O best among Vanaras! tat = for that reason; pravishya = enter; puriim = the city; raavaNa paalitaam = ruled by Ravana; i vidhtva = do; yaani yaani = whatever; vaanchasi = you desire; sarva kaaryaaNi = all those tasks; iha = here.

अनुवादः

“O best aming Vanaras! For that reason, enter the city of Lanka ruled by Ravana and do here whatever tasks you want to.”

स्रोतः: valmikiramayan.net

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

vinaashaH = destruction; samupaagataH = has come; raavaNasya = of Ravana; durraatmanaH = the evil minded; raaJNAH = king; sarveshhaam rakshasaam cha = and to all Rakshasas; siitaa nimittam = due to Seetha.

अनुवादः

“The destruction has come for Ravana the evil minded king and to all Rakshasas due to Seetha.”

स्रोतः: valmikiramayan.net

विश्वास-प्रस्तुतिः

प्रविश्य शापोपहतां हरीश्वर
पुरीं शुभां राक्षसमुख्यपालिताम् ।
यदृच्छया त्वं जनकात्मजां सतीं
विमार्ग सर्वत्र गतो यथासुखम् ॥ ५१ ॥

सर्वाष् टीकाः
मूलम्

प्रविश्य शापोपहतां हरीश्वर
पुरीं शुभां राक्षसमुख्यपालिताम् ।
यदृच्छया त्वं जनकात्मजां सतीं
विमार्ग सर्वत्र गतो यथासुखम् ॥ ५१ ॥

मूलम् - VR

प्रविश्य शापोपहताम् हरीश्वर । शुभाम् पुरीम् राक्षसराजपालिताम् । यदृच्छया त्वम् जनकात्मजाम् सतीम् । विमार्ग सर्वत्र गतो यथासुखम् ॥ ५-३-५१

अनुवाद (हिन्दी)

‘वानरेश्वर! राक्षसराज रावणके द्वारा पालित यह सुन्दर पुरी अभिशापसे नष्टप्राय हो चुकी है । अतः इसमें प्रवेश करके आप स्वेच्छानुसार सुखपूर्वक सर्वत्र सती-साध्वी जनकनन्दिनी सीताकी खोज कीजिये’ ॥ ५१ ॥

अनुवाद (कन्नड)

हरीश्वरने! ‘‘राक्षसराजनाद रावणनिन्द परिपालिसल्पडुत्तिरुव सुन्दरवाद ई लङ्कानगरियु आगले शापदिन्द विनाशहॊन्दिदॆ. शुभकरवाद ई लङ्कॆयन्नु प्रवेशिसि, स्वॆच्छॆयिन्द ऎल्ल कडॆगळल्लियू सुखवागि सञ्चरिसुत्ता निरातङ्कवागि साध्वियाद जनकन मगळन्नु हुडुकु.’’ ॥51॥

Murali Krishnamurthy Kopalle Murthy

पदच्छेदः

hariishvaraa = O lord of Vanaras! pravishya = enter; puriim = the city; yadR^ichhayaa = freely; shaapopahataam = stuck by curse; raakshasa raaja paalitaam = ruled by the king of Rakshasas; shubhaam = auspicious one; tvam = you; sarvatra gataH = being gone everywhere; vimaargasva = search; satiim janakaatmajaam = the chaste wife Seetha; yathaa sukham = according to comfort.

अनुवादः

“O lord of Vanaras! Enter the auspicious city of Lanka stuck by the curse, ruled by the king of Rakshasas, roam everywhere and search for the chaste wife Seetha according to your comfort.”

स्रोतः: valmikiramayan.net

समाप्तिः

इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डे तृतीयः सर्गः ॥ ३ ॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके सुन्दरकाण्डमें तीसरा सर्ग पूरा हुआ ॥ ३ ॥

अनुवाद (समाप्तिः) (कन्नड)

महर्षि वाल्मीकि विरचित आदिकाव्यवाद श्रीमद्रामायणद सुन्दरकाण्डएदल्लि मूरने सर्गवु मुगियितु.