बीसवीं शताब्दी में उत्पन्न हुए अनेक कवियों और रचे गए अनेक काव्यों का विवरण ऊपर दिया गया है। इन कवियों के अतिरिक्त कतिपय अन्य कवि भी इस कालावधि में हुए जिन्होंने किसी न किसी विधा या विषय में काव्य-सर्जना की। अर्वाचीनयुग के लघुकाव्यकारों ने जहाँ रघुवीर मिश्र ‘द्विरेफ’ (१८६०-१९३७) ने अपने आश्रयदाता राजा की प्रशंसा में ‘लक्ष्मीश्वरोपायनम्’ तथा ‘श्रीशारदोपायनम्’ काव्य लिखे, वहाँ टी.ए. भण्डारकर ने आत्मभिव्यक्तिपरक काव्य ‘विद्यार्थीआत्मचरितम्’ की रचना की। श्री अवधनाथ पाण्डेय ने दुर्गा की स्तुति में ‘श्रीदुर्गाशतक’ की रचना की। राम नारायण शास्त्री पाण्डेय ने राधा की स्तुति में ‘श्रीहरिवल्लभास्तोत्रम्’ लिखा तो स्वामी अखण्डानन्द सरस्वती ने ‘हनुमत्स्तोत्र’ काव्य। पण्डितरामचन्द्र भारतीय का बुद्धभक्तिपरक काव्य ‘बुद्धभक्तिशतकम्’ प्रकाशित हुआ तो पं. सूर्य नारायण मिश्र का ‘नग्नसिद्धचरितम्’ भी। मिथिलेशकुमारी मिश्रा ने ‘व्यासशतकम्’ लिखकर सौ पद्यों द्वारा व्यास के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला है। अरविन्द आश्रम, पाण्डिचेरी से श्री अरविन्द-कृत भवानीभारती’ लघुकाव्य २३५ का प्रकाशन हुआ। वसन्त त्र्यम्बक शेवडे ने एक ओर ‘रघुनाथतार्किकशिरोमणिचरितम्’ जैसा चरितप्रधान काव्य लिखा तो दूसरी ओर ‘अभिनवमेघदूतम्’ की रचना कर मेघदूत में अचर्चित स्थानों का वर्णन किया। जम्मू के वेद कुमारी तथा राम प्रताप का संस्कृत-कविता संग्रह ‘ऊर्मिका’ नाम से प्रकाशित हुआ। शम्भुनाथ आचार्य ने स्वामी विवेकानन्द के जीवन पर ‘विवेकानन्दात्मकम्’ खण्डकाव्य लिखा। रमाशङ्कर मिश्र ने ‘मारुति-चरितम्’ तथा ‘करपात्रपूजाञ्जलिः’ दो काव्यों का प्रणयन किया। वीरभद्र मिश्र ने ‘अनुनयः’ नाम के शृङ्गारपरक काव्य की रचना की। कवि विद्यासागर का ‘पञ्चशती’ नामक सङ्कलन भी प्रकाशित हुआ, जिसमें भ्रमणशतक, निरंजनशतक, भावनाशतक, परीशतक तथा सनीतिशतक ये पाँच शतक सङ्कलित है। विद्यासागर पाण्डेय का ‘अभिनवभारतराष्ट्रम्’ राष्ट्रभक्तिपरक लघुकाव्य है, जो १EEO में प्रकाशित हुआ। इसी प्रकार १६८६ में यागेश्वर झा का ‘वन्दे वाणीविनायकौ’ काव्य प्रकाश में आया। १६६२ के भारत-चीन युद्ध के बाद कवि रामकैलाश पाण्डेय ने ‘भारतशतकम्’ काव्य लिखा। क्षीरोदचन्द्र दाश का तारुण्य को विषय बनाकर लिखा गया शृङ्गारप्रधान काव्य ‘तारुण्यशतकम्’ भी एक अच्छा काव्य है। कवि परड्डीमल्लिकार्जुन द्वारा प्रणीत “अक्कमहादेवीशतकम्’ तथा ‘गङ्गाधरशतकम्’ इस काल के सुन्दर भक्तिकाव्य हैं। चन्दनलाल पाराशर के ‘मङ्गलं भारतम्’ लघुकाव्य में भारत की सांस्कृतिक, भौगोलिक और सामाजिक सुषमा का सुन्दर वर्णन है। श्री शुकदेव शर्मा मुनि द्वारा प्रणीत ‘मङ्गलानक्षत्रम्’ ६३ कविताओं का सङ्कलन है जिसमें आधुनिक युग से सम्बन्धित अनेक सुभाषित विद्यमान हैं। उमा देशपाण्डे का ‘अर्चनम्’ काव्य विविध विषय की प्रायः वन्दनापरक स्फुट कविताओं का सुन्दर संग्रह है। उमाशङ्कर शर्मा त्रिपाठी का ‘अहंराष्ट्री’ काव्य राष्ट्रभक्तिपरक काव्यों में उत्तम है। कवि भूषण हेमचन्द्र राय ने तीन लघुकाव्यों का प्रणयन किया-सत्यभामापरिग्रहम, रुक्मिणीहरणम् तथा पाण्डवविजयः । इनके अतिरिक्त कतिपय अन्य लघुकाव्यों और उनके रचयिताओं के नाम इस प्रकार हैं-दयानन्दलहरी (मेधावताचार्य), वाताहह्वानम् (पं. केदारनाथ), सुगलार्थमाला (ब्रह्मश्रीनारायण), श्री शङ्करकथामृतम्- (वि. रामप्परेतवाल), देवदूतम् (सुधाकर शुक्ल), भावलहरी (प्रकाश शास्त्री), वाणी (राजशेषगिरि राब), सकल्पकल्पद्रुमः (विश्वनाथ चक्रवर्ती), श्रीगान्धिचरितम्-(श्री चारुदेव शास्त्री), प्रियदर्शिनी इन्दिरा (सुबोध कुमार मिश्र), इन्दिराकाव्यम् (भोलानाथ मिश्र), राष्ट्रतन्त्रम् (लक्ष्मी नारायण शुक्ल), मालतीमञ्जरी (सोमनाथ शर्मा), जवाहरचरितम् (मिजाजीलाल शर्मा), प्रेमलहरी (के भास्कर पिल्लई), श्रीवृन्दावनमहिमामृतम् (श्री प्रबोधानन्द सरस्वती), लोकमान्यतिलकचरितम् (कृ.वा.चितले), भारतसन्देश (शिवप्रसाद भारद्वाज), अम्बालहरी, होलिकालास, उदरप्रशस्तिकाव्य (हरिशर्मा दाधीच), राधानयनद्विशती (बालकृष्ण झा), अम्बाष्टादशी, गङ्गास्तव, चन्द्रोपालम्भवर्णन (रघुनाथ शास्त्री), स्तुतिमुक्तावली (कपिलदेव द्विवेदी), सुरवाणीप्रशस्तिका (विशुद्धानन्द शास्त्री), सौन्दर्यवल्ली (डॉ. अमरनाथ पाण्डेय), काव्यकौतुकम् (राजदेव मिश्र), मरीचिका (राजेन्द्रनानावती), सारस्वतमुपायनम् (रामनारायण मिश्र), पौरच्छात्रीयम् गणेश व्यासशतकम्, २३६ आधुनिक संस्कृत साहित्य का इतिहास सुभाषितसुमनोञ्जलिः (मिथिलेशकुमारी मिश्रा), शान्तिशतकम् (प्रीतमलाल नृसिंहलाल कच्छी), शिवासम्बन्धः (पं. रामावध मिश्र), श्रीजगन्नाथरथोत्सवः (पं. गुणनिधिदाश शर्मा), राष्ट्रपतिराजेन्द्रवंशप्रशस्तिः (विष्णुकान्त झा), धन्वन्तरिजन्मामृतम् (प्रभुदत्त शास्त्री), हरिचरितम् (परमेश्वर भट्ट), सत्यविजयम् (श्री.ति.शु. वरदाचार्य), गान्धी-विजयः (सदाशिव दीक्षित), राजस्थानप्रस्थानम् (बदरीनाथ शर्मा), काव्यसरित् (अनन्त विष्णु काणे), श्रीमद्भगवत्परशुम विजयशतकम् (अमियचन्द्र शास्त्री) आदि। बीसवीं शताब्दी में अनेक दूतकाव्य एवं शतककाव्य भी लिखे गए, जिनकी संख्या बहुत अधिक है। उनमें से कतिपय प्राप्त एवं काव्य ये हैं - सुभाषितशतकम् (कृष्णमाचार्य), जार्जदेवशतकम् (लक्ष्मणसूरि), भारतशतकम् (महादेव पाण्डेय), यतीन्द्रशतकम् (केवलानन्द शर्मा), गुरुमाहात्म्य (कैलाशनाथ द्विवेदी), विज्ञानशतकम् (कृष्णभाऊ शास्त्री धुले), दरिद्रनारायणशतकम्’ (जगन्नाथ व्यास), इन्दिराशतकम् (रामकृष्ण शास्त्री), वचनदूत (मूलचन्द्र शास्त्री), भारतसन्देश (शिवप्रसाद भारद्वार), कर्गजशरदूत (रवीन्द्र कुलकर्णी), शुनकदूत झञ्झावातदूत (के के. कृष्णमूर्ति), दक्षिणानिलदूत (भोलाशङ्कर व्यास) आदि। बीसवीं शताब्दी के दसवें एवं अन्तिम दशक में भी लघुकाव्य-प्रणयन प्रवर्तमान है। विगत दो दशकों में ऐसे अनेक कवि हुए हैं जिन्होंने कोई विशिष्ट काव्य नहीं लिखे अथवा ग्रन्थ रूप में काव्य प्रकाशित नहीं हुए, परन्तु उनका प्रौढ एवं सरस काव्य-प्रणयन स्फुट रूप से चलता रहा। विविध पत्र-पत्रिकाओं में उनके काव्यांश यत्र-तत्र प्रकाशित होते रहे हैं, अनेक कविगोष्ठियों आदि में उनकी काव्य-प्रतिभा के दर्शन होते हैं, तथा कतिपय कवि ऐसे हैं जो प्रमुखतया गीतकार हैं, लघुकाव्यविधा में उनका योगदान नहीं है, ऐसे अनेक प्रतिभा-प्रकर्ष से युक्त कवियों का विवरण या समीक्षण यहाँ प्रस्तुत नही किया गया है। कतिपय अन्य लघुकाव्य एवं लघुकाव्यकार ऐसे भी हो सकते हैं जो प्रयास करने पर भी यहाँ अनन्त कवि परम्परा में अदृष्ट रह गए हों, पर आधुनिक संस्कृत साहित्य में उनका स्थान एवं योगदान बहुमूल्य है।
तृतीय अध्याय