केरल के शासक केरलवर्मा के भतीजे रामवर्मा ने ‘भारतसङ्ग्रह’ नामक विशाल काव्य की रचना की। यह रखें सर्ग के मध्यभाग तक ही प्राप्त होता है। इस कवि की 9. त्रिचूर से १६१४ ई. में प्रकाशित। २. यह महाकाव्य हस्तलिखित ग्रन्थागार मद्रास में उपलब्ध है। परवर्ती संस्कृत महाकाव्य ५५६ मृत्यु वि.सं.१५००) (१४४३ ई.) में हो गयी थी। रामवर्मा ने चन्द्रिकाकलापीड नामक पाँच अंकों का नाटक भी रचा था, जिसमें कलिंगराज की पुत्री चन्द्रिका के काशी के राजा कन्दर्पशेखर से प्रेम-विवाह की कथा है। ‘भारतसङ्ग्रह’ काव्य की भाषा अत्यन्त सरल है।