०६ रघुवीरचरित

‘रघुवीरचरित” में श्रीरामचन्द्र के वनवास से राज्याभिषेक तक की कथा वर्णित है। इसमें १७ सर्ग हैं, जिनमें प्रौढ़ि और व्युत्पत्ति का प्रदर्शन है। इसके रचयिता का नाम ज्ञात नहीं है। आफेक्ट ने अपनी पुस्तक-सूची में इसे किसी मल्लिनाथ की रचना माना है। यदि प्रसिद्ध कोलाचल मल्लिनाथ इसके रचयिता हों तो इसका रचनाकाल १४वीं सदी के लगभग होगा। कीर्तिराज-यह कवि १४वीं-१५वीं सदी के सन्धिकाल में हुआ। इनका लिखा १४१७ ई. का प्रशस्तिलेख जैसलमेर के पराव जिनालय में उत्कीर्ण है। इसके नेमिनाथ महाकाव्य में १२ सर्ग हैं। इसमें ऋतुओं, विवाहोत्सवों आदि का वर्णन महाकाव्यानुसार पारंपरिक प्राप्त होता है।