०५ नरकासुरविजय

‘नरकासुरविजय’ महाकाव्य के प्रणेता माधव कवि विजयनगर में १४वीं सदी के अन्त में हुए थे। ये विजयनगर के महामंत्री विरूपाक्ष के आश्रय में रहे। इनके रचे नरकासुर महाकाव्य के केवल नौ सर्ग प्राप्त होते हैं। इसमें श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर पर विजय प्राप्त करने की प्रसिद्ध कथा वर्णित है। इन्होंने कालिदास की प्रशंसा में यह श्लोक लिखा है - जगदानन्दजननी जयत्यव्याजकोमला। कविता कालिदासस्य कलेवाधकलानिधेः।। इसी प्रकार क्षेमेन्द्र की कविताकौमुदी की भी उन्होंने स्तुति की है - कथं कविचकोराणामर्पितामिव पारणाम्। सजा सिट जित स्तुमः क्षेमेन्द्रचन्द्रस्य कविताकौमुदीमिमाम् ।। ला लिगायतका