०४ उदारराघव

साकल्यमल्ल का ‘उदारराघव’ १८ सर्गों में रचा गया महाकाव्य है। स्वप्न में राम से प्रेरित होकर यह महाकाव्य रचा गया था। १८ में से अब केवल ६ सर्ग ही प्राप्त होते हैं। इसमें रघुवंश के समान संक्षेप में सम्पूर्ण रामकथा कही गयी है। इसमें वैदर्भी रीति, ललित पदविन्यास और उदात्त कल्पनाओं का मनोहर सामंजस्य है। इसका काव्य-सौष्ठव उल्लेखनीय है। इस काव्य की दो टीकाएँ प्राप्त होती हैं। साकल्यमल्ल के उपनाम मल्लाचार्य और कविमल्ल भी थे। कवि को विवाद का अच्छा अभ्यास था। सम्भवतः इसीलिए उनके नाम के आगे मल्ल उपाधि जुड़ गयी है। इस परवर्ती संस्कृत महाकाव्य साकल्य को वेदान्तदेशिक के पुत्र नयनाचार्य ने सिंगभूपाल की विद्वत्परिषद् में पराजित किया था। यह घटना १३३० ई. के लगभग की है। इस साकल्यमल्ल के पिता का नाम माधव था। यह कवि अद्वैत वेदान्त का अनुयायी था। मायापालिकामा शिवकालका का नाममा IF