वेंकटनाथ वेदान्तदेशिक (१२६८-१३६६ ई.) ने संस्कृत और तमिल में लगभग १२० ग्रन्थ लिखे। वे काँची के निवासी थे और रामानुज के विशिष्टाद्वैत के अनुयायी थे। उन्होंने ‘यादवाभ्युदय’ नामक २४ सर्गों का एक महाकाव्य लिखा, जिसमें कृष्णकथा है। इसमें कथाओं को दार्शनिक पृष्ठभूमि प्रदान की गयी है। इसमें विमान से भूतल का रमणीय वर्णन भी है। इसके छठे सर्ग में शब्दालंकारों का प्रदर्शन है। लेखक ने विभिन्न शैलियों का भी प्रदर्शन किया है। इनके पाण्डित्य के कारण इसे वेदान्ताचार्य, कविताकिंकसिंह और सर्वतन्त्रस्वतन्त्र उपाधियाँ दी गयीं। इनके इस काव्य की टीका अप्पय दीक्षित (१६०० ई.) ने की है। इस महाकाव्य के प्रथम दस सों में कृष्णजन्म और कंसवधपर्यन्त कृष्णलीलाओं का विस्तृत चित्रण है। अनन्तर चौबीसवें सर्ग तक महाभारत युद्ध और भूभारापनयन तक की घटनाएँ वर्णित हैं। आख्यान-शैली तथा वर्णन रोचक हैं।