अप्पय दीक्षित संभवतया कांची के निवासी शैव दर्शन के प्रसिद्ध आचार्य थे। वे उदार, भक्त तथा महान् दार्शनिक थे। वेदान्तदेशिक ने वरदराज की स्तुति की है, संभवतः उसी से प्रेरणा लेकर अप्पय दीक्षित ने ‘वरदराजस्तव’ की रचना की। दीक्षित जी का समय स्तोत्रकाव्य १६११ वि.सं. (१५५४ ई.) लगभग माना जाता है।