१७ रुद्रन्यायपञ्चानन का पिकदूत

“पिकदूत’ काव्य में राधा ने वृन्दावन से पिक को दूत बनाकर श्रीकृष्णजी के पास मथुरा भेजा है। कृष्ण-विरह में व्याकुल राधा को वन में एक कोकिल दिखाई देती है। अपनी उन्मत्त अवस्था में वह कोकिल से ही अपना सन्देशवाहक बनने का निवेदन करती है। इस लघु सन्देश-काव्य में अन्य सन्देशवाहक की अपेक्षा कोकिल की श्रेष्ठता का कथन करके उसकी यात्रा के लिए उपयुक्त यान, अश्व और सारथि का भी वर्णन किया गया है। वृन्दावन से मथुरा दूर नहीं है, अतः मार्गवर्णन नहीं है। मथुरा में श्रीकृष्णजी के पास कोकिल के पहुँचने की सम्भावना कर राधा ने उसे अपना सन्देश बताया है। सन्देश-कथन के पश्चात् काव्य समाप्त होता है काव्य-सौन्दर्य : ‘शार्दूलविक्रीडित’ छन्द में निबद्ध इस काव्य में माधुर्य-गुण और वैदर्भी रीति है। भाव तथा रस के अनुकूल कवि की भाषा प्रवाहमयी है। कवि ने विरहव्याकुल राधा की अचेतनावस्था और कृष्णदर्शन की उत्सुकता का भावमुग्ध वर्णन किया है। राधा अपनी विरहावस्था का वर्णन करती है। यथा - १. श्री अनन्तलाल ठाकुर द्वारा प्राच्य वाणी पत्रिका, कलकत्ता से सन् १६४५ में प्रकाशित। म गौरी कोकिल मे परा तनुरियं कृष्णेन कृष्णीकृता सुस्थं शुद्धमुदारमेव परमं चित्तञ्च मत्तं कृतम्। किञ्चास्यामपवादिनी परिकृता गोपालपुर्यामहं नो जानामि तथापि यन्मम मनस्तं चैव संचिन्तयेत् ।। २८ ।। सरस और सुन्दर यह लघुतम सन्देश-काव्य है। राधा और कृष्ण के भक्तों के लिये यह उपादेय है।