१४ नारायण कवि का सुभगसन्देश

श्रीमान् नारायण कवि का ‘सुभग-सन्देश’ एक महत्त्वपूर्ण सन्देश-काव्य है। यह काव्य १३० श्लोकों में निबद्ध है। इस काव्य में केरल के ऐतिहासिक, भौगोलिक दृष्टि से सन्देशकाव्यपरम्परा बहुत सी जानकारी उपलब्ध है। इस काव्य का कवि राजा रामवर्मन् की सभा में राजकवि था। सोलहवीं शती में इस काव्य की रचना की गई। इस सन्देश-काव्य की नायिका मानवी मेनका है, जो अपने प्रेमी से उस समय बिछुड़ गई थी, जब वे त्रिचूर में रहते हुए जीवन का आनन्द ले रहे थे। भाग्य की विडम्बना से नायक बिछुड़ कर ‘केप-कामेरिन’ पहुँच जाता है। इस काव्य का सन्देशवाहक ‘सुभग’ नामक स्नातक ब्राह्मण है, जो लाट देश का निवासी है। नायक ‘सुभग’ को केप-कामेरिन से त्रिचूर अपना सन्देश ले जाने की प्रार्थना करता है, जहाँ उसकी नायिका निवास करती है। दक्षिण से गन्तव्य-स्थान उत्तर की ओर जाने वाला मार्ग तमिल प्रदेश से होकर जाता है। सन्देशवाहक को प्रथम चिदम्बरम् जाना है और वहाँ से पालघाट होते हुए केरल वापिस आना है। मार्ग में इरालकुट्टी, पानाकुट्टी, अल्वार तिख्नगरी, श्रीरंगम् और जम्बूकेवरम् का वर्णन है। देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करने के लिये कहा है। कोयम्बतूर से त्रिचूर जाकर नायिका को सन्देश देने के लिये प्रार्थना की गई है। यहाँ पर काव्य समाप्त होता