१५ साहित्यरत्नाकर

‘साहित्यरत्नाकर’ सत्रहवीं शताब्दी के कवि यज्ञनारायण दीक्षित का महाकाव्य है। यज्ञनारायण दीक्षित के पिता का नाम गोविन्द दीक्षित और माता का नाम नागाम्बा था। ये सुकवि नीलकण्ठ दीक्षित तथा राजचूडामणि दीक्षित के विद्यागुरु और वेङ्कटेश्वर दीक्षित के अनज थे। इनके पिता गोविन्द दीक्षित चिरकाल तक तजौर के राजा के मंत्री रहे। तजौरनरेश रघुनाथ नायक का इनके ऊपर बड़ा स्नेह था। इन्होंने अपने पिता तथा रघुनाथ नायक से भी काव्यरचना की प्रेरणा और संस्कार ग्रहण किये। यज्ञनारायण की अन्य रचना रघुनाथविलास नाटक है। साहित्यरत्नाकर महाकाव्य में उन्होंने राजा रघुनाथ का चरित्र उपनिबद्ध किया है। इस महाकाव्य में सोलह सर्ग हैं। प्रथम सर्ग में उपोद्घात के अनन्तर चोलनरेश और उनकी राजधानी तञ्जापुरी का वर्णन है। द्वितीय सर्ग में चाल देश की स्त्रियों, नगर के सारे वातावरण और सामाजिक स्थिति का सजीव चित्रण यज्ञनारायण ने किया है। - तृतीय सर्ग से तजौर के नायकवंशीय राजाओं का वर्णन आरंभ किया गया है, जिसमें चेन्चप्पा नायक, उसके पुत्र अच्युतराय तथा इनके विवाह, शासनकाल, वैभव, साहित्यिक प्रतिभा और गुणग्राहिता तथा ईश्वरभक्ति का विवरण दिया गया है। चतुर्थ सर्ग में रघुनाथ का जन्म और बाल्यकाल चित्रित है। आगे के सर्गों में महाकाव्योचित वर्ण्यविषय हैं तथा दशम सर्ग में युद्ध की योजना, चोलक राजा के अत्याचारों का वर्णन तथा रघुनाथ की ओर इन पर आक्रमण की तैयारी का विशद चित्रण है। अंतिम तीन सों में युद्ध का विस्तृत वर्णन है। यज्ञनारायण वैदर्भी रीति और सरस काव्यात्मक अभिव्यक्ति के कारण सुकवि के रूप में मान्य हैं । ऐतिहासिक दृष्टि से भी उनका काव्य तजार के राजाओं के विषय में महत्त्वपूर्ण सूचनाएं प्रदान करता है तथा तत्कालीन राजनीतिक स्थितियों पर भी प्रकाश डालता