१० कादम्बरीकथासार

‘कादम्बरीकथासार’ के कर्ता महाकवि अभिनन्द हैं, पर ये रामचरितमहाकाव्य के रचयिता अभिनन्द से भिन्न हैं। दोनों ही अभिनन्द कश्मीर के हैं तथा दोनों के रचनाकाल में बहुत अधिक अन्तर नहीं है। यद्यपि कादम्बरीकथासार को सर्वधा मौलिक महाकाव्य नहीं कहा जा सकता, पर बाण की कादम्बरी को काव्यात्मक रूप के पूरे निर्वाह के साथ पद्यबद्ध करने की दृष्टि से तथा कवित्वप्रकर्ष की दृष्टि से भी यह रचना परम्परा में समादृत रही है। इस काव्य में ८ सर्ग हैं। अभिनवगुप्त, क्षेमेन्द्र तथा भोज ने कादम्बरीकथासार से अनेक पद्य उद्धृत किये हैं। __कादम्बरीकथासारकर्ता अभिनन्द जयन्तभट्ट के पुत्र थे और इनका समय नवम शती का पूर्वार्ध-माना गया है। जयन्तभट्ट अपने समय के सुप्रसिद्ध दार्शनिक रहे हैं। इनका समय ८५० से ७५ ई. है। अभिनन्द ने अपना और अपने वंश का किंचित् परिचय दिया है। तदनुसार इनके पूर्वज गौडदेशीय थे और कश्मीर में बाद में आ बसे। अभिनन्द का समय ८७५ से ६०० ई. अर्थात् नवमशती का उत्तरार्ध है। कादम्बरीकथासार में आठ सर्गों में कादम्बरी की कथा संक्षेप में पद्यबद्ध की गयी है। बाणभट्ट की कादम्बरी अनेक कवियों को रचना के लिये प्रेरित करती रही है। महाकवि क्षेमेन्द्र ने भी ‘पद्यकादम्बरी’ काव्य की रचना की थी। त्रिविक्रम (विक्रमदेव ने चौदहवीं शताब्दी में सत्रह सर्गों में कादम्बरीकथासार लिखा। एक अन्य कवि त्र्यम्बक ने भी कादम्बरीकथासार की रचना की है। कीमत