इस शतक के रचयिता मधुसूदन मैथिल कवि हैं। इनके पिता का नाम पद्मनाभ और माता का नाम शुभदा है। यद्यपि इनके समय का निश्चय नहीं है। किन्तु ये विशेष प्राचीन १. द्रष्टव्य- काव्यमाला नवमगुच्छक में प्रकाशित २. इष्टव्य, काव्यमाला गुच्छक नवम ३. द्रष्टव्य, काव्यमाला गुच्छक नवम १२६ मुक्तक-काव्य-परम्परा : शतककाव्य नहीं है। इस शतक में अन्योक्ति की प्रधानता है। कविता प्रसादमयी है। एक उदाहरण द्रष्टव्य है- मामात इतस्ततः श्रावणवारिवाह किमूषरे वारिकरव्ययेन। बुरा त्वमुर्वरां शश्वदिमां निषिञ्च जीवातुभूता जगतां यदेषा ।।८३ ।। नाम गाता