२४ ईश्वरशतक

o ARE THANE काश्मीरी अवतार कवि के द्वारा विरचित काव्य ईश्वरशतक’ में भगवान शंकर की स्तुति है। अवतार कवि का आविर्भाव सत्रहवीं शती के प्रथम चतुर्थांश (१६२५ ई.) में हुआ। इस काव्य की रचनाशैली आनन्दवर्धन के देवीशतक के समान नाना बन्धों से संयुक्त है। प्रतीत होता है कि काश्मीर में मध्ययुग में इस प्रकार की रचना का विशेष प्रचलन था। ईश्वरशतक में ११३ पद्य नाना छन्दों में हैं। जिलागि जिस्म एक उदाहरण पर्याप्त है भव जलवायुन भोजन रुचिकर-म (म) दनलराज रमा (सा) मयदेह। अव मामतिमोहक मारसहर हर नम इह ते पुर भयदेह ।। १०५ किमि