२३ सुन्दरीशतक

उत्प्रेक्षावल्लभ कवि की यह रचना बड़ी ही मनोहारिणी, रसमयी तथा प्रसादमयी है। कवि का मूलनाम गोपाल था, परन्तु उत्तम काव्यरचना के कारण उत्प्रेक्षावल्लभ कहलाते थे। इस शतक का रचनाकाल सोलहवीं शती है। इनके देश का पता नहीं चलता। इस शतक में १११ पद्य हैं। एक उदाहरण द्रष्टव्य है त्वमधिक गुणासि मालति मल्लीलवलीलवङ्गलतिकाभ्यः। DIR सकललतिकानुसारी यथानिबद्धःषडविरपि (900) मामि विनि