१८ कोदण्डशतक

कोदण्डशतक धारानगरी में भोज के द्वारा बनवाये गये प्रासाद में प्रस्तरशिलाओं पर उत्कीर्ण है। शतक की पुष्पिका में इसे भोजरचित ही कहा गया है- इतिमहाराजाधिराजपरमेश्वर श्रीभोजदेवविरचितः कोदण्ड इत्यादि। तथापि अन्तःसाक्ष्य से प्रमाणित होता है कि इस शतक की रचना भोज ने नहीं, उनके किसी सभापण्डित ने की होगी। इस शतक में राजा भोज के शौर्य का ओजस्वी वर्णन है और भोज की प्रशस्ति इसकी विषयवस्तु है। १. द. परमार इंस्किप्सस, पृ. ७० तथा प्रतिभा भोजराजस्य : डॉ.भगवतीलाल राजपुरोहित पृ. ५४ महामार काव्य-खण्डमा आई THIS जा गिनी