१७ नागराजकत भावशतक

भावशतक की पुष्पिका से विदित होता है कि नागराज धारा के राजा थे। कर्पटिगोत्र के विद्याधर उनके पूर्वपुरुष थे, उनका वंश टाकवंश कहलाता था। इस वंश में विद्याधर के पुत्र जालप हुए और उनके पुत्र नागराज। नागराज का समय विचारणीय है। भावशतक के अंतिम पांच पद्यों (६८-१०२) में जिस प्रकार नागराज की वंशावली तथा प्रशस्ति प्रस्तुत की गयी, उससे लगता है कि यह शतक उनका स्वयं का लिखा न होकर उनके आश्रित किसी कवि ने उनके नाम पर रचा होगा। __भावशतक शृङ्गारपरक स्फुट श्लोकों का संकलन है, जिसके साथ चूर्णिमा भी दी गयी है। इन पद्यों में दूतिकावचन, विभ्रम और हाव, वसंत-वर्णन आदि शृंगारकाव्य के पिटेपिटाये अभिप्रायों का अनुवर्तन अधिक है, नवीनता का आकर्षण नहीं है। TE साता किनि