०७ बाणभट्ट

महाकवि बाणभट्ट भगवती सरस्वती के वरदपुत्र थे। इन पर लक्ष्मी और सरस्वती दोनों की समान- कृपा रही। महाकवि ने अपना जीवन चरित अपनी गद्य कृति ‘हर्षचरित’, के आरम्भ में सविस्तार दिया है। ये शोणनदी के किनारे शाहाबाद (आरा) के निवासी थे। ब्रह्मा से चित्रभानु तक की वंशावली में बाण पिता चित्रभानु व माता राजदेवी के पुत्र थे। बचपन में ही बाण की माता का देहान्त हो गया था तथा जब वे १४ वर्ष के थे तब पिताश्री का निधन हो गया था, फलतः बाण आवारा वृत्ति के होकर अनेक कुमित्रों के साथ अनेक Pा काव्य-खण्डमा बम देशों में घूमते रहे। समयान्तर में वे थानेश्वर नरेश हर्षवर्धन के सभापण्डित बने। बाण संस्कृत गद्य साहित्य के सम्राट् माने जाते हैं। उनका समय छठी शताब्दी माना जाता है। pिhotीका