०५ मयूरभट्ट

मयूरभट्ट नामक अनेक कवि, राजा व मन्त्री मिलते हैं। इनमें से एक मयूर कवि महाराज हर्षवर्धन के सभापण्डित थे। राजशेखर ने लिखा है-म की सात तासन्यता अहो प्रभावो वाग्देव्या यन्मातङ्ग-दिवाकरः। नकली शाट श्रीहर्षस्याभवद् सभ्यः समो बाणमयूरयोः।। रको हर्षचरित में बाण ने मयूर को अपना बचपन का साथी बताते हुए लिखा है कि मयूर उनका जाङ्गलिक मायूरक नाम साथी है (हर्षचरित, जीवानंद, प्र.उ.पृ.E१) पं. बलदेव उपाध्याय ने अपनी कृति ‘संस्कृत सुकवि समीक्षा’ में मयूरभट्ट का सम्पूर्ण परिचय दिया है। बाण का समय सन् ६०० से ६७८ है अतः यही समय मयूरभट्ट का माना जाना चाहिए। १. द्र, मर्तृहरिस्मारिका में डा. राधावल्लभ त्रिपाठी तथा डा, भगवतीलाल राजपुरोहित के लेख। गत TT BATTLES THL TELL HET मुक्तक-काव्य-परम्परा : शतककाव्य जान । कि